महाकाल मंदिर की आय ने बनाया नया रिकॉर्ड, 142 करोड़ रुपए का दान; पिछले साल से 27 करोड़ अधिक

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उज्जैन 
महाकाल लोक बनने के बाद बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ दान का प्रवाह भी लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महाकाल मंदिर समिति को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है, जिसमें केवल दान मद से ही 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। यह बीते छह वर्षों में सबसे अधिक दान है और पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 27 करोड़ रुपए ज्यादा है।

मंदिर समिति के अनुसार दान पेटियों से 62 करोड़ रुपए, नगद काउंटर पर 5 करोड़ 50 लाख रुपए, मनी ऑर्डर से 1.23 लाख रुपए, ऑनलाइन माध्यम से 3 करोड़ 60 लाख रुपए, अन्नक्षेत्र से 3 करोड़ 38 लाख रुपए तथा गुप्त दान के रूप में 4 करोड़ 65 लाख रुपए प्राप्त हुए।

लड्‌डू की बिक्री 65 करोड़ की
वहीं लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की आय हुई। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के करोड़ों रुपए मूल्य के आभूषण भी दान किए हैं।

गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

दान कक्ष में सिली हुई जेब वाले कपड़ों में ही मिलती है एंट्री
राम मंदिर में दान को लेकर चल रहे विवाद के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया ने बताया कि मंदिर में प्राप्त होने वाले दान के संबंध में पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। मंदिर परिसर में कुल 95 दान पेटियां स्थापित हैं, जिनमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में दान करते हैं। इसके अलावा श्रद्धालु क्यूआर कोड के माध्यम से भी ऑनलाइन दान कर रहे हैं।

हर सप्ताह दान पेटियां खोली जाती हैं। इन्हें सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणना कक्ष तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद निरीक्षक, सहायक प्रशासक तथा मंदिर समिति के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। दान की गणना की फोटोग्राफी कराई जाती है और पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है।

दान की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों को विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्हें बिना जेब वाले कपड़े या सिली हुई जेब वाले परिधान पहनने के बाद ही गणना कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे।

दान बढ़ा तो खर्च भी दोगुना हुआ
श्री महाकाल लोक के लोकार्पण से पहले महाकाल मंदिर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर था, जो विस्तार के बाद बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। वर्तमान में मंदिर समिति के कुल 306 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के वेतन के अलावा मंदिर की सुरक्षा, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, पर्व-त्योहारों की व्यवस्थाएं, धर्मशाला, अन्नक्षेत्र, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान, गोशाला तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बड़ी राशि खर्च होती है।

मासिक खर्च भी बढ़कर 5 करोड़ से ज्यादा
इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि, श्रावण मास, नागपंचमी सहित अन्य प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अतिरिक्त व्यय किया जाता है। पहले मंदिर का मासिक खर्च करीब 2.5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक प्रतिमाह हो गया है।

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