43 शिक्षकों से करोड़ों की लोन ठगी, 5 आरोपी गिरफ्तार, लैपटॉप और चेकबुक बरामद

Editor
6 Min Read
43 शिक्षकों से करोड़ों की लोन ठगी, 5 आरोपी गिरफ्तार, लैपटॉप और चेकबुक बरामद
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

कोंडागांव.

जिले के फरसगांव और केशकाल थाना क्षेत्र में शिक्षकों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरजिला संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। करीब तीन महीने तक चली तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार अब तक इस गिरोह ने 43 शिक्षकों को अपना शिकार बनाया है और उनसे करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। हालांकि कुछ पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि बदनामी और सामाजिक संकोच के कारण कई लोग अब भी सामने नहीं आए हैं। उनका दावा है कि जिले में 150 से 200 शिक्षक इस तरह की ठगी का शिकार हो सकते हैं।

शिकायतों से खुला करोड़ों की ठगी का राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब फरसगांव निवासी संजय कोडोपी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उन्हें और उनके साथियों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर करीब दो करोड़ रुपये की ठगी की गई। इसी तरह बड़ेडोंगर निवासी अनंत कुमार निर्मलकर ने करीब चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। वहीं केशकाल क्षेत्र के देवेन्द्र किशोर खवास, योगेश्वर बैद्य सहित अन्य शिक्षकों ने भी करोड़ों रुपये की ठगी की रिपोर्ट पुलिस को दी। इन शिकायतों के आधार पर फरसगांव और केशकाल थानों में कुल चार अलग-अलग अपराध दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

ऐसे फंसाए जाते थे शिक्षक
जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से संगठित तरीके से इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। गिरोह पहले शिक्षकों से संपर्क करता और कम समय में कई बैंकों से बड़ी राशि का पर्सनल लोन दिलाने का भरोसा देता। इसके बाद बैंक कर्मचारियों और लोन एजेंटों के माध्यम से अलग-अलग बैंकों में लोन आवेदन करवाए जाते। लोन स्वीकृत होने के बाद शिक्षकों को केवल 40 प्रतिशत राशि दी जाती, जबकि शेष 60 प्रतिशत रकम आरोपियों और उनके सहयोगियों के विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा ली जाती थी। आरोपी पीड़ितों को भरोसा दिलाते थे कि दो से तीन वर्षों के भीतर पूरा लोन, ब्याज और एचआरए सहित चुका दिया जाएगा। लेकिन कुछ समय बाद आरोपी रकम लेकर फरार हो जाते थे और पूरा कर्ज शिक्षकों के सिर पर छोड़ देते थे।

फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंकों से कराया लोन
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने कई मामलों में फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। कई शिक्षकों के पते में बदलाव कर नकली आधार कार्ड बनवाए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों से लोन स्वीकृत कराया गया।

तीन महीने चली तकनीकी और वित्तीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा (आईपीएस) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चंद्रा के मार्गदर्शन में एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय और एसडीओपी केशकाल अरुण नेताम के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ितों और आरोपियों के बैंक खातों का विस्तृत विश्लेषण किया। मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। लगातार तीन महीने तक अलग-अलग जिलों में दबिश देने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार –

  • शिवशंकर दास (अंबिकापुर)
  • दिलीप कुमार सोनी (अंबिकापुर)
  • विरेंद्र तिर्की (जशपुर)
  • श्यामसुंदर जांगड़े (सारंगढ़)
  • अंशुमान सिंह (अंबिकापुर)

जब्त किए गए सामान
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, बैंक चेकबुक, एटीएम कार्ड, डायरी और रजिस्टर, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर समेत अन्य महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सभी दस्तावेजों की जांच जारी है।

अन्य जिलों तक नेटवर्क फैले होने की आशंका
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक एजेंटों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की ठगी को अंजाम दे चुका है। इसी कारण जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

बैंकिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने बैंकिंग प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के अनुसार एक बैंक से लिया गया लोन क्रेडिट रिकॉर्ड (CIBIL/Loan Database) में अपडेट होने में लगभग 6 से 7 दिन का समय लग जाता है। इसी अंतराल का फायदा उठाकर आरोपी पीड़ितों के नाम पर दो से तीन दिनों के भीतर अलग-अलग बैंकों से कई पर्सनल लोन स्वीकृत करा लेते थे। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सभी बैंकों के बीच रियल-टाइम क्रेडिट वेरिफिकेशन और लोन हिस्ट्री की तत्काल जांच की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए, ताकि एक ही व्यक्ति को कम समय में कई बैंकों से समानांतर लोन मिलने की संभावना समाप्त हो सके।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *