छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री ने तोड़े रिकॉर्ड, 24 घंटे में 41.75 करोड़ की बिक्री, पिछले साल से 23% अधिक

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छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री ने तोड़े रिकॉर्ड, 24 घंटे में 41.75 करोड़ की बिक्री, पिछले साल से 23% अधिक
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रायपुर

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आबकारी विभाग के खजाने में धनवर्षा हो रही है। बढ़ती गर्मी और उमस के बीच प्रदेश में शराब की खपत ने पिछले सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। हाल ही में जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार बीते 22 अप्रैल को प्रदेशवासियों ने महज 24 घंटे के भीतर 41 करोड़ 75 लाख रुपए से अधिक की शराब खाली कर दी। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 23.3 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है।

बिक्री के आंकड़ों में राजधानी रायपुर एक बार फिर शीर्ष पर रहा है। अकेले रायपुर जिले में एक दिन में 7.39 करोड़ रुपए की शराब बिकी। औद्योगिक नगरी दुर्ग 5.09 करोड़ रुपए के साथ दूसरे और न्यायधानी बिलासपुर 3.71 करोड़ रुपए की खपत के साथ तीसरे स्थान पर रही। बड़े शहरों में शराब की यह मांग लंबे समय से बरकरार है, लेकिन इस साल के आंकड़ों ने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है।

कोरिया और सुकमा में रिकार्ड बढ़ोत्तरी

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू छोटे और दूरस्थ जिलों से सामने आया है। विकास की दौड़ में पीछे माने जाने वाले इन जिलों में शराब की खपत की रफ्तार मेट्रो शहरों से भी तेज है। कोरिया जिले में पिछले वर्ष की तुलना में 78.4 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि हुई है।

वहीं, माओवाद प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद सुकमा में 74 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी और सूरजपुर में बिक्री में 65.9 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि, नारायणपुर और बीजापुर जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंच सीमित होने के कारण बिक्री में गिरावट देखी गई है।
अप्रैल में आठ अरब के पार पहुंचा कारोबार

नया वित्तीय वर्ष शुरू हुए अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन 22 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में आठ अरब 66 करोड़ रुपए से अधिक की शराब बेची जा चुकी है।

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बिक्री बढ़ने के मुख्य कारण

 एक अप्रैल से दुकानों पर कई नए विदेशी और देशी ब्रांड उपलब्ध कराए गए हैं। भीषण गर्मी को भी बीयर और शराब की बढ़ती मांग का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन ने भी खपत को बल दिया है।

आबकारी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही प्रवृत्ति जारी रही, तो चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक राजस्व प्राप्ति के सभी पुराने कीर्तिमान धराशायी हो सकते हैं।

 

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