बस्तर की पद्मा के घर लौटी रोशनी साय सरकार की ‘बिजली बिल समाधान योजना’ बनी अनाथ बेटी का संबल

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रायपुर

 बस्तर के घने जंगलों के बीच बसे छोटे से गांव बालेंगा में रहने वाली पद्मा कश्यप के लिए बीते कुछ साल अंधेरे और अनिश्चितता से भरे थे। लेकिन आज पद्मा के चेहरे पर मुस्कान है और उसके छोटे से घर में उम्मीदों का उजाला है। यह बदलाव आया है मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की ‘बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ से।

संघर्षों के बीच अंधेरे का साया
          
पद्मा की कहानी संघर्ष और धैर्य की दास्तां है। कम उम्र में ही माता-पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद पद्मा घर में अकेली रह गईं। आय का कोई स्थायी जरिया नहीं था और जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी करना ही एक बड़ी चुनौती थी। इसी तंगहाली के बीच घर का बिजली बिल बकाया होते-होते 9,000 रुपये तक जा पहुँचा। एक अनाथ बेटी के लिए, जिसे दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा हो, इतनी बड़ी राशि चुकाना नामुमकिन था। बिल न पटा पाने के कारण घर की बिजली कटने की कगार पर थी और पद्मा का भविष्य अंधेरे की ओर बढ़ रहा था।

योजना ने दिया नया जीवन
         
 जब पद्मा को राज्य सरकार की बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के बारे में पता चला, तो उसे उम्मीद की एक किरण दिखाई दी। योजना के तहत पद्मा के मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें बकाया बिल पर 4,000 रुपये की सीधी राहत प्रदान की गई। यह केवल पैसों की छूट नहीं थी, बल्कि एक अनाथ बेटी को यह अहसास कराना था कि उसकी सरकार उसके साथ खड़ी है। इस सहायता के बाद पद्मा अपना शेष बकाया चुकाने में सक्षम हुईं और उनके घर की बिजली कटने से बच गई।

"मुख्यमंत्री का आभार, मेरे घर का अंधेरा दूर हुआ"
         

अपनी खुशी साझा करते हुए पद्मा कहती हैं— "जब बिल 9 हजार हो गया था, तो मुझे लगा अब कभी घर में उजाला नहीं होगा। लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की योजना ने मुझे सहारा दिया। 4 हजार की छूट मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। आज मेरा घर फिर से रोशन है और इसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी को दिल से धन्यवाद देती हूँ।"

भरोसे की नई इबारत
         
पद्मा कश्यप की यह कहानी छत्तीसगढ़ के उन हजारों परिवारों का प्रतिनिधित्व करती है, जो आर्थिक तंगी के कारण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो रहे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की यह नीति दर्शाती है कि शासन का लक्ष्य केवल विकास नहीं, बल्कि 'अंत्योदय' यानी अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की सेवा है।
बस्तर के सुदूर वनांचल में जलता पद्मा के घर का वह बल्ब आज केवल बिजली से नहीं, बल्कि सरकार के प्रति अटूट विश्वास से चमक रहा है।

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