किंग ऑफ द नॉर्थ’ की धमाकेदार जीत से ब्रिटेन की सियासत में भूचाल, क्या Keir Starmer की कुर्सी खतरे में?

Editor
3 Min Read

लंदन 
ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. लेबर पार्टी के दिग्गज नेता और ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम ने संसदीय उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज की है, जिसके बाद प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर की कुर्सी पर खतरा और बढ़ गया है. उन्हें "किंग ऑफ द नॉर्थ" कहा जाता है। 

उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड सीट पर हुए चुनाव में बर्नहम ने 54.8 फीसदी वोट हासिल किए. उन्होंने निगेल फराज की पार्टी रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया, जिसे 34.5 फीसदी वोट मिले. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत हो सकती है। 

अपनी जीत के बाद बर्नहैम ने इसे "टर्निंग पॉइंट" यानी एक निर्णायक मोड़ बताया. उन्होंने कहा कि देश को ऐसी राजनीति से बचाना होगा जो समाज को बांटती है. बर्नहैम ने संकेत दिया कि वह देश को अमेरिका जैसी पोलराइज्ड राजनीति की दिशा में नहीं जाने देना चाहते। 

अगर नेतृत्व का होगा चुनाव तो बर्नहैम हो सकते हैं उम्मीदवार
56 वर्षीय बर्नहैम लंबे समय से लेबर पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं. वह सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण के आलोचक रहे हैं और कई बार खुलकर कह चुके हैं कि पिछले चार दशकों की आर्थिक नीतियां आम लोगों के लिए सफल नहीं रही हैं. उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि अगर पार्टी नेतृत्व के लिए चुनाव होता है तो वह उम्मीदवार बनने को तैयार हैं। 

दूसरी तरफ, किएर स्टार्मर की लोकप्रियता लगातार गिर रही है. दो साल पहले भारी बहुमत से चुनाव जीतने वाले स्टार्मर आज ब्रिटेन के सबसे अलोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में गिने जा रहे हैं. कई विवादों, नीतियों में बार-बार बदलाव और फैसलों में देरी के आरोपों ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है.

सांसदों ने किएर स्टार्मर से मांगा इस्तीफा
पिछले महीने हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को बड़ा झटका लगा था. इसके बाद पार्टी के करीब एक चौथाई सांसदों ने स्टार्मर से पद छोड़ने की मांग की थी. रक्षा और स्वास्थ्य मंत्री समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा दे दिया। 

हालांकि, स्टार्मर अभी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे. उन्होंने साफ कहा है कि वह किसी भी नेतृत्व चुनाव का सामना करेंगे और पार्टी को आंतरिक लड़ाई से बचना चाहिए. लेकिन बर्नहैम की जीत के बाद उनके लिए दबाव और बढ़ गया है। 

अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है तो पिछले एक दशक में ब्रिटेन को सातवां प्रधानमंत्री मिल सकता है. इतनी तेजी से नेतृत्व बदलना ब्रिटिश राजनीति में अस्थिरता का संकेत माना जा रहा है। 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live