छत्तीसगढ़ में ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ लागू, खनन कारोबार में बढ़ेगी पारदर्शिता

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रायपुर.

छत्तीसगढ़ सरकार ने खनिज कारोबार को पारदर्शी बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल लागू होने के बाद अब खदान संचालकों को रॉयल्टी पर्ची के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ई-रॉयल्टी और ई-ट्रांजिट पास की सुविधा 24 घंटे ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी और मानवीय हस्तक्षेप कम होने से गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी।

खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद के अनुसार, नई व्यवस्था से खदानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो गई है। इससे अवैध उत्खनन, ओवरलोडिंग और बिना परमिट खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। अब हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिसे कभी भी जांचा जा सकेगा।
जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) फंड की निगरानी को भी डिजिटल किया गया है। ‘DMF 2.0’ पोर्टल के जरिए अब सभी प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां ऑनलाइन होंगी, जिससे यह स्पष्ट रहेगा कि पैसा किस योजना में और किस उद्देश्य से खर्च किया गया। हर साल करीब 2 हजार करोड़ रुपए के इस फंड में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की गई है।

रेत खदानों को लेकर भी सरकार ने ‘वन स्टेट-वन पॉलिसी’ लागू की है। अब खदानों का आबंटन ई-टेंडरिंग के जरिए किया जा रहा है और अब तक करीब 200 नई खदानों की नीलामी हो चुकी है। इससे रेत की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर नियंत्रण की उम्मीद है।

बस्तर संभाग में आदिवासी परिवारों को राहत देते हुए टिन की खरीदी दर 640 रुपए से बढ़ाकर 2800-2900 रुपए प्रति किलो कर दी गई है। साथ ही अब भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और आय में सीधा फायदा मिलेगा।
अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर लागू इस डिजिटल सिस्टम से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

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