27 अक्टूबर से शुरू होगा कार्तिक मास, दीपावली से छठ और देवउठनी एकादशी तक होंगे प्रमुख पर्व

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 भक्ति, साधना, संयम और पुण्य अर्जित करने की परंपराओं से जुड़ा कार्तिक मास में प्रमुख पर्व त्योहार होंगे। शरद ऋतु की शीतलता के बीच दीपों की रोशनी, मंदिरों में गूंजते भजन, तुलसी पूजन और पवित्र नदियों में स्नान के साथ यह महीना धार्मिक आस्था और लोकसंस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा।

27 अक्टूबर से 24 नवंबर तक चलने वाले इस मास में करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ महापर्व, देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास भगवान विष्णु को विशेष प्रिय है। इस दौरान सुबह स्नान, भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा, तुलसी सेवा, दीपदान, व्रत और कथा श्रवण को पुण्यदायी माना जाता है।

मान्यता है कि नियमित दिनचर्या, आत्मसंयम, सेवा और दान के माध्यम से व्यक्ति आध्यात्मिक शांति को प्राप्त करता है। माह में मंदिरों से लेकर घरों तक पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों की विशेष छटा देखने को मिलेगी।

बाजारों में खरीदारी और घरों में तैयारियों का माहौल बनने लगेगा। धनतेरस पर बर्तन और आभूषण खरीदने की परंपरा के बाद दीपावली पर घर-आंगन दीपों से जगमगाएंगे।

इसके बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज पारिवारिक रिश्तों की आत्मीयता को मजबूत करेंगे। छठ के दौरान घाटों पर उमड़ने वाली श्रद्धा, लोकगीतों की गूंज और पारंपरिक प्रसाद बिहार की सांस्कृतिक पहचान को विशेष रूप से सामने लाएंगे।
मास के प्रमुख पर्व-त्योहार:

29 अक्टूबर : करवा चौथ
महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत करेंगीं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व के दिन सुहागिन शिव पार्वती की उपासना कर व्रत करेंगी। गणेश और कार्तिकेय के साथ चंद्रदेव का पूजा होगा।

छह नवंबर : धनतेरस
धन और आरोग्य की कामना के साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाएगी। बाजारों में बर्तन, आभूषण और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी की परंपरा रहेगी।

आठ नवंबर : दीपावली
घरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाए जाएंगे। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ रोशनी का पर्व मनाया जाएगा।

10 नवंबर : गोवर्धन पूजा और चित्रगुप्त पूजा
गोवर्धन पूजा में अन्नकूट का विशेष महत्व रहेगा। कायस्थ समाज के लोग कलम-दवात और बहीखातों की पूजा कर चित्रगुप्त महाराज का स्मरण करेंगे।

11 नवंबर : भाई दूज
बहनें अपने भाई की सलामती को लेकर इस दिन व्रत रखकर पूजन करेंगी। बहनें भाई को घर बुलाकर तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख व समृद्धि की कामना करती हैं।

13 से 16 नवंबर:
लोक आस्था का महापर्व नहाय-खाय से आरंभ होगा। 13 नवंबर को व्रती नहाय-खाय करेंगी। 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। 16 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन होगा।

18 नवंबर : अक्षय नवमी
इस दिन श्रद्धालु आंवला वृक्ष का पूजन करने के साथ दान पुण्य करते हैं। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की विधि-विधान के साथ पूजन करते हैं।

21 नवंबर : देव उठनी एकादशी
भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागने की मान्यता से जुड़ा यह पर्व मांगलिक कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। तुलसी विवाह की परंपरा भी इसी अवधि में निभाई जाती है। इस दिन मठ-मंदिरों में भगवान विष्णु की पूजा होने के साथ इस दिन से मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएगा।

24 नवंबर : कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान और दान पुण्य का विशेष महत्व होता है। वहीं, सिख समुदाय गुरु नानक देव की जयंती प्रकाश पर्व के रूप में मनाएंगे।

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