ओमान के डुक्म बंदरगाह पर भारतीय नाविक की मौत, अमेरिकी नौसेना पर मदद न करने का आरोप

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मस्कट
 ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक पोत पर सवार एक भारतीय नागरिक की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण मौत हो गई। भारतीय दूतावास ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर बताया कि मृतक की पहचान निशांत उर्थनाथन के रूप में की गई है। उसने बताया कि जब निशांत की मौत हुई उस समय वह मोटर टैंकर (एमटी) सेलेस्टियल सी पर सवार थे। खुलासा हुआ है कि एमटी सेलेस्टियल के क्रू ने रेडियो कम्युनिकेशन के जरिए अमेरिकी नौसेना के बार-बार मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। अब दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना मृतक नाविक निशांत उर्थनाथन के शव को निकालने की अनुमति नहीं दे रही है

अमेरिकी नौसेना से कई बार मांगी गई मदद
स्पुतनिक इंडिया ने एमटी सेलेस्टियल सी शिप के रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना को मदद के लिए बार-बार कॉल किया। इसमें भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन को बहुत ज्यादा उल्टी होने की रिपोर्ट दी गई। लेकिन, अमेरिकी नौसेना की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। बाद में 11 जून को निशांत उर्थनाथन की सांसें रुक गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी नौसेना अभी भी लाश को निकालने की इजाजत नहीं दे रही है।

एमटी सेलेस्टियल शिप के कैप्टेन ने घटना के बारे में बताया
रिपोर्ट में एमटी सेलेस्टियल सी शिप पर हुई घटना को लेकर एक लेटर भी शेयर किया गया है। इसमें जहाज के कप्तान राजेंद्र यादव समेत कई दूसरे कर्मचारियों के हस्ताक्षर भी हैं। इसमें लिखा है, "यह सूचित किया जाता है कि निशांत उर्थनाथन, पीपी क्रमांक 58104330, रैंक द्वितीय अधिकारी, ने 08.06.2026 को दोपहर 12:00 बजे अस्वस्थता और लगातार उल्टी होने की सूचना दी। उन्होंने कंपनी कार्यालय को सूचित किया और वीएचएफ चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना को फोन करके रोगी की स्थिति के बारे में बताया

लगातार उल्टी से पीड़ित था भारतीय नाविक
उन्होंने आगे लिखा, "शाम तक द्वितीय अधिकारी के स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उल्टी की तीव्रता बढ़कर हर 5-10 मिनट में होने लगी। उन्हें ओन्डेट-एमडी की गोली दी गई। शाम 4:00 बजे उन्होंने फिर से उल्टी कर दी। शाम 7:00 बजे उन्हें फिर से ओन्डेट-एमडी की गोली दी गई। रात 11:00 बजे एक बार उल्टी हुई। उस रात उल्टी नहीं हुई। 09.06.2026 को भी उल्टी नहीं हुई, केवल पेट और शरीर में दर्द था। उसे तरल दाल, चावल, ओआरएस और पानी पिलाया जा रहा था।"

अमेरिकी नौसेना ने नहीं की मदद
लेटर में आगे लिखा है, "10.06.2026 को हमने उन्हें तरल पदार्थ, भोजन और पानी दिया। हमने कंपनी को लगातार सूचित किया और वीएचएफ चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना को भी लगातार फोन करके बीमार मरीज की स्थिति के बारे में बताया, लेकिन फिर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। डॉक्टर की सलाह के अनुसार, हमने दवाएं दीं और वीएचएफ चैनल 16 के माध्यम से एजेंटों/अमेरिकी नौसेना के ज़रिए तटवर्ती सहायता का प्रयास किया।"

शिप ने कई बार अमेरिकी नौसेना से संपर्क साधा
लेटर के अनुसार, "11 जून 2026 की सुबह 6 बजे उन्होंने पानी और भोजन लेना बंद कर दिया। डीआई की सलाह के अनुसार, कंपनी को लगातार सूचना दी गई। हमने दवाइयां दीं और एजेंटों/अमेरिकी नौसेना के माध्यम से वीएचएफ चैनल 16 पर तटवर्ती सहायता का प्रयास किया। दोपहर 12 बजे लंगर उठाकर ओमान के निकटतम बंदरगाह दुकुम की ओर बढ़ना शुरू किया। दुकुम, ओमान के बंदरगाह नियंत्रण को फोन करके द्वितीय अधिकारी के चिकित्सा निकासी की आवश्यकता बताई गई।"

जहाज पर फंसा है भारतीय नाविक का शव
जहाज के कप्तान ने बताया, "बंदरगाह नियंत्रण ने दुकुम में स्थानीय एजेंट से संपर्क किया। दोपहर 2 बजे तक कंपनी ने हमें एजेंट का विवरण दिया। हमने यह जानकारी दुकुम बंदरगाह नियंत्रण को दे दी। दोपहर 3 बजे के बाद वह बेहोश हो गया, शाम 5 बजे पता चला कि उसकी सांसें रुक गई हैं। उसे कई बार सीपीआर दिया गया, ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और उसकी नब्ज जांची गई, जो उस समय ठीक थी। बाद में शाम 6 बजे पता चला कि उसकी नब्ज भी रुक गई है। कंपनी से लगातार संपर्क में है लेकिन हेलीकॉप्टर से बचाव नहीं हो पाया है।"

 

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