संयुक्त राष्ट्र युवा सम्मेलन में चमकेगा भारत, संजय वर्चुअली करेंगे प्रतिनिधित्व

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दुमका.

झारखंड की उपराजधानी दुमका के काठीकुंड प्रखंड अंतर्गत बड़तल्ली गांव के संजय पाल समय पर वीजा नहीं बन पाने के कारण अमेरिका नहीं जा सकेंगे, लेकिन अब वह वर्चुअल माध्यम से लॉस एंजिल्स में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के 13वें अंतरराष्ट्रीय युवा सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

संजय पाल का चयन नेतृत्व क्षमता व तार्किक-व्याख्यात्मक कौशल के कठोर मूल्यांकन के आधार पर इस वैश्विक मंच के लिए हुआ है। सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के करीब 20 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे। संजय वर्चुअल रूप से जुड़कर भारत की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखेंगे। उनका कहना है कि यदि भारत की युवा आबादी को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में मजबूत आधार मिले तो देश विश्व पटल पर महाशक्ति बन सकता है। उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाकर समाज की सेवा करना है।

संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की प्रेरक कहानी:
संजय पाल का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता कार्तिक पाल मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता रेणुका पाल ने सीमित शिक्षा के बावजूद बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। आर्थिक तंगी के दौर में संजय की मां ने रात में मूढ़ी (लाई) भूनकर परिवार का सहारा बनने का प्रयास किया, लेकिन लगातार धुएं में काम करने से उनका स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। इसके बाद संजय ने स्वयं पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने साप्ताहिक बाजारों में कपड़े की दुकानों पर काम किया और ग्रामीण क्षेत्रों में पावरोटी बेचकर पढ़ाई का खर्च निकाला, लेकिन पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।

राज्य टॉपर से लेकर राष्ट्रीय मंच तक:
संकटों के बीच संजय ने 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और आगे चलकर उच्च माध्यमिक परीक्षा में प्रखंड टाप करने के साथ अर्थशास्त्र में पूरे झारखंड में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर राज्य टॉपर बने। इसके बाद उन्होंने सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान, विकसित भारत युवा संवाद 2026 और बजट क्वेस्ट 2026 जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। उनके प्रदर्शन के लिए रांची स्थित रिम्स ऑडिटोरियम में माय भारत झारखंड की निदेशक ललिता कुमारी द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया। शिक्षकों और मार्गदर्शन के सहारे संजय ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी प्रतिभा को साबित किया, और आज वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने को तैयार हैं।

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