भारत-न्यूजीलैंड FTA पर हस्ताक्षर, व्यापार और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

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भारत-न्यूजीलैंड FTA पर हस्ताक्षर, व्यापार और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार
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 नई दिल्ली

 भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आज भारत मंडपम में हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले मौजूद रहेंगे।

यह समझौता मार्च 2025 में शुरू हुई बातचीत के बाद दिसंबर 2025 में अंतिम रूप से तैयार हुआ था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है। पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता आने वाले महीनों में लागू होगा और इससे भारत-न्यूजीलैंड के बीच व्यापार को नई गति मिलेगी।

भारत को क्या होगा फायदा?
इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले करीब 70 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा। पीयूष गोयल के मुताबिक, इससे आगरा के लेदर उद्योग, उत्तर प्रदेश के हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों को नए मौके मिलेंगे। यह समझौता खास तौर पर श्रम आधारित और MSME सेक्टर के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।

इस समझौते में सेवा क्षेत्र को भी शामिल किया गया है। इसके तहत भारतीय पेशेवरों के लिए हर साल 5000 अस्थायी वीजा दिए जाएंगे, जिनकी अवधि तीन साल तक होगी। इन वीजा के तहत आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा। इसके अलावा आयुष विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक भी इसमें शामिल होंगे।

नियमों में राहत और कृषि सहयोग
FTA के तहत नियमों को आसान बनाया जाएगा और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम किया जाएगा। इससे भारतीय दवाओं और मेडिकल उपकरणों को न्यूजीलैंड में जल्दी मंजूरी मिल सकेगी।

कृषि क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। कीवी, सेब और शहद जैसे उत्पादों पर एग्री-टेक्नोलॉजी प्लान के जरिए सहयोग बढ़ाया जाएगा। इस समझौते का लक्ष्य अगले पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार को 2.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

न्यूजीलैंड को क्या मिलेगा?
इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड को भारत में अपने 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में छूट या समाप्ति का लाभ मिलेगा। इनमें ऊन, कोयला, लकड़ी, वाइन, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पाद शामिल हैं, जबकि कुछ उत्पादों पर कोटा लागू होगा। हालांकि भारत ने डेयरी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है, ताकि घरेलू किसानों और उद्योगों की सुरक्षा हो सके।

हस्ताक्षर से पहले पीयूष गोयल और टॉड मैक्ले ने अपने परिवार के साथ ताजमहल का दौरा किया और करीब दो घंटे वहां बिताए। इस दौरान गोयल ने आगरा के उद्योगपतियों से भी मुलाकात की, जिसमें लेदर, टेक्सटाइल, मसाले, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट और कारपेट सेक्टर के प्रतिनिधि शामिल थे।

उन्होंने कहा कि आगरा भविष्य में निर्यात के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा और यहां के उद्योगों की समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही देशभर में 100 इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की योजना के तहत आगरा के पास भी एक नया औद्योगिक पार्क बनाने पर विचार किया जा रहा है।

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