यूपी में 15 साल बाद बढ़ सकता है हाउस टैक्स, लाखों लोगों पर बढ़ेगा बोझ

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लखनऊ
उत्तर प्रदेश के लाखों शहरी नागरिकों पर जल्द ही हाउस टैक्स का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। करीब 15 वर्षों बाद उत्तर प्रदेश के कई नगर निगमों में गृहकर की दरों में संशोधन की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड ने उन नगर निगमों को टैक्स दरें पुनर्निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं, जहां लंबे समय से कर दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

बोर्ड का मानना है कि नगर निकायों की आय बढ़ाने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए कर ढांचे का पुनरीक्षण जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से 14 जुलाई को प्रदेश के सभी नगर निगमों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कर निर्धारण सूची में संशोधन और नई दरें लागू करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

लखनऊ में 2010 के बाद नहीं बढ़ा गृहकर
बैठक में सामने आया कि कई शहरों में पिछले 15 वर्षों से हाउस टैक्स की दरें यथावत हैं। लखनऊ में वर्ष 2010 के बाद गृहकर की दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ। वर्ष 2016 और 2023 में दरें बढ़ाने की कोशिश की गई थी, लेकिन पार्षदों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के चलते प्रस्ताव लागू नहीं हो सका। बोर्ड के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डीएम कटियार ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में नगर निगमों के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं जबकि राजस्व वृद्धि अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच रही है। ऐसे में कर निर्धारण सूची का पुनरीक्षण आवश्यक है। इसी वजह से बैठक में सभी को रेट रिवाइज करने के लिए कहा गया है।

नई मानक मूल्यांकन प्रणाली के आधार पर होगा संशोधन
वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड के सचिव उदयभानु त्रिपाठी द्वारा 13 जुलाई को बैठक का एजेण्डा जारी किया गया। इसमें कर निर्धारण सूची में संशोधन और वर्ष 2025 की मानक मूल्यांकन पद्धति को शामिल किया गया है। इसके तहत विभिन्न श्रेणियों की संपत्तियों के लिए गृहकर दरों की समीक्षा की जाएगी।

केवल टैक्स नहीं, अन्य राजस्व स्रोतों पर भी मंथन
बैठक में नगर निकायों की आय बढ़ाने के अन्य उपायों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों और कर्मचारियों को दी जाने वाली कुछ कर छूटों की समीक्षा, ट्रेड लाइसेंस व्यवस्था में सुधार, नगर निगम परिसरों में स्थित भवनों के कर निर्धारण तथा गृहकर अधिरोपण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल रहे।

बढ़ेगा राजस्व, निकाय होंगे मजबूत
वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड का कहना है कि नगर निगमों को आत्मनिर्भर बनाने और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की दिशा में यह कदम जरूरी है। हालांकि गृहकर दरों में संभावित बढ़ोतरी से आम नागरिकों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

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