महिला पुलिसकर्मियों की सुविधाओं पर हाई कोर्ट सख्त, शौचालय और 8 घंटे ड्यूटी पर मांगा जवाब

Editor
4 Min Read

चंडीगढ़
 पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुलिस सुधारों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि पुलिस सुधारों पर फैसला कोर्ट नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन को लेना चाहिए। हालांकि हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को इन मुद्दों पर दो महीने में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

इस मामले में दायर याचिका में मांग की गई कि पुलिसकर्मियों से लगातार लंबी ड्यूटी न कराई जाए, थानों में महिलाओं के लिए अलग और साफ शौचालय हों, आरोपितों को मीडिया के सामने परेड न कराया जाए और पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए।

चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने हालांकि इन मांगों पर सीधे आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया, लेकिन पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों को इन मुद्दों पर विचार कर फैसला लेने के निर्देश जरूर दे दिए।

सरकार को करना होगा फैसला
अदालत ने कहा कि ये विषय नीतिगत और प्रशासनिक प्रकृति के हैं, जिन पर फैसला सरकार और सक्षम अधिकारियों को ही करना है।यह जनहित याचिका मोहाली निवासी निकिल सराफ ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि पुलिसकर्मियों, खासकर कांस्टेबलों के लिए पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं, जिससे पूरे करियर में ठहराव की स्थिति बन जाती है।

मांग रखी गई कि प्रत्येक कांस्टेबल को सेवा के दौरान कम से कम तीन प्रमोशन दिए जाएं। साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवास, पर्याप्त अवकाश, मेडिकल जांच और कठिन ड्यूटी के बदले अतिरिक्त वेतन जैसी सुविधाएं देने की भी मांग उठाई गई।

महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं
याचिका में पुलिस थानों और चौकियों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। कहा गया कि कई जगह महिलाओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं हैं। लाकअप की हालत भी मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं है। अदालत से मांग की गई कि थानों में साफ-सुथरे और रोशनी वाले लॉकअप बनाए जाएं तथा पुलिस शिकायत प्राधिकरणों की जानकारी हर थाने में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए।

इसके अलावा पुलिस बल के डिजिटलीकरण और संसाधनों के बेहतर उपयोग का मुद्दा भी उठाया गया। याचिका में कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के कारण आम पुलिसिंग प्रभावित होती है।

सोशल ऑडिट करवाने की मांग 
इस व्यवस्था का स्वतंत्र सोशल ऑडिट कराने की मांग भी रखी गई।सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिका में उठाए गए कई मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में लंबित एक अन्य मामले में विचाराधीन हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने केवल उन बिंदुओं पर सुनवाई की जो वहां लंबित नहीं हैं।

अंत में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 30 दिन के भीतर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को विस्तृत मांग पत्र देने की छूट देते हुए कहा कि संबंधित सरकार और प्रशासन दो महीने के भीतर उस पर स्पीकिंग ऑर्डर पारित कर निर्णय लें।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live