लापता लड़कियों के मामलों पर हाई कोर्ट सख्त, पुलिस को लगाई फटकार; जांच के तरीके पर उठाए सवाल

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ग्वालियर
 मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने लापता युवती की तलाश में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए भिंड के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को जांच अधिकारी तत्काल बदलने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जांच ऐसे अधिकारी को सौंपी जाए, जिसकी रैंक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से कम न हो। साथ ही एसपी को शपथपत्र प्रस्तुत कर यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि अब तक की जांच प्रभावी और उचित थी या नहीं।

कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि पुलिस ऐसे मामलों को अत्यंत हल्के में ले रही है और जांच का जिम्मा ऐसे लापरवाह और अक्षम अधिकारियों को सौंप दिया जाता है, जिन्हें आधुनिक या प्रभावी तफ्तीश का ककहरा तक नहीं मालूम।

भिंड के आलमपुर थाने में दर्ज एक गुम इंसान मामले में गंभीरता से कार्रवाई नहीं करने के केस पर हाईकोर्ट की डबल बेंच सुनवाई कर रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने भिंड एसपी को वर्तमान जांच अधिकारी को तत्काल हटाने और मामले की कमान 'अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक' स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने के कड़े निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि वर्तमान जांच अधिकारी एएसआई ओंकार सिंह तोमर जांच में कोई प्रभावी प्रगति नहीं कर सके। अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित एएसआइ कोर्ट के सवालों का संतोषजनक जवाब भी नहीं दे पाए। उन्होंने केवल इतना बताया कि इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कोई सुराग नहीं मिला और संदिग्ध गांव में भी मिला था। केस डायरी का अवलोकन करने पर कोर्ट ने पाया कि जांच केवल आसपास के लोगों को फोटो दिखाकर पूछताछ तक सीमित रही। अदालत ने टिप्पणी की कि यह जांच का प्रभावी तरीका नहीं माना जा सकता और यह बताना एसपी भिंड की जिम्मेदारी है कि ऐसी जांच को उचित कैसे माना जा सकता है।

ASI बोले- इंस्टाग्राम-फेसबुक देख लिया, सुराग नहीं मिला

यह पूरा मामला भिंड जिले के आलमपुर थाने से जुड़ा है, जहां एक पिता ने अपनी लापता बेटी की बरामदगी के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच के समक्ष आलमपुर थाने में तैनात एएसआई ओंकार सिंह तोमर केस डायरी लेकर व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे।

कोर्ट ने जब उनसे लड़की की तलाश को लेकर किए गए प्रयासों पर सवाल दागे, तो एएसआई को जवाब देते नहीं बना। उन्होंने अदालत को बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि 'मैंने लड़की का इंस्टाग्राम और फेसबुक खंगाला है, लेकिन वहां कोई सुराग नहीं मिला।' वैसे, संदिग्ध को गांव में ही देखा गया था।"

24 घंटे के भीतर जांच अधिकारी को हटाएं

इस पर कोर्ट ने काफी नाराजगी जताई और कहा कि विवेचना अधिकारी सिर्फ फेसबुक व इंस्टाग्राम तक ही सीमित हैं। ASI के इस जवाब पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आईओ जांच करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। क्या पुलिस की तफ्तीश अब सिर्फ सोशल मीडिया स्क्रॉल करने तक सीमित रह गई है? बेंच ने सख्त संदेश देते हुए निर्देशित किया है।

    गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज होने पर पुलिस उसे कतई हल्के में न ले।
    लापता व्यक्ति को ढूंढने के लिए हर संभव, वैज्ञानिक और गंभीर प्रयास किए जाएं।
    भिंड एसपी 24 घंटे के भीतर वर्तमान जांच अधिकारी को हटाएं।
    किसी एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारी को केस सौंपें, जो अपनी पूरी ताकत लड़की को बरामद करने में झोंके।

भिंड एसपी से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा

हाईकोर्ट ने केवल निचले स्तर के अधिकारी को ही नहीं, बल्कि भिंड पुलिस अधीक्षक को भी आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसपी खुद जांच अधिकारियों की सक्षमता को परखे बिना ही लापरवाही से केस सौंप रहे हैं। अदालत ने भिंड एसपी से अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत हलफनामा मांगते हुए 3 बिंदुओं पर जवाब तलब किया है।

हाई कोर्ट ने एसपी भिंड से यह भी पूछा है कि क्या उन्होंने इस मामले की केस डायरी की कभी समीक्षा की और जांच अधिकारी को कोई निर्देश दिए थे या नहीं। अदालत ने एसपी को अगली सुनवाई तक इस संबंध में विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि मध्यप्रदेश में पुलिस कई मामलों में गुमशुदा लड़कियों की तलाश को गंभीरता से नहीं ले रही।

 

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