राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, निर्वाचन आयुक्त तलब आज

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 जयपुर
राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर एक बार फिर तेजी आ गई है। राजस्थान हाईकोर्ट में आज गुरुवार को पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई होगी। इन याचिकाओं में अदालती आदेश के बावजूद चुनाव में देरी का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही बुधवार को सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव में देरी को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं होने को लेकर आज गुरुवार को दोपहर 2 बजे राज्य निर्वाचन आयुक्त को व्यक्तिश: अथवा वर्चुअल माध्यम से हाजिर होने का निर्देश दिया। साथ ही ओबीसी आरक्षण के मामले में जानकारी देने के लिए ओबीसी आयोग सचिव को भी मौजूद रहने को कहा है।

ओबीसी आयोग ने किया 5 लाख से अधिक का सर्वे
ताजा जानकारी के अनुसार ओबीसी आयोग ने पांच लाख से अधिक परिवारों का सर्वे पूरा कर लिया है। इसके अलावा सर्वे कार्य में लगाए गए करीब 15 हजार कर्मचारी तबादले के बाद रिलीव हो गए थे, उनके स्थान पर नए कर्मचारी लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राजस्थान की राजधरा एप में आ रही समस्या को भी दूर कर दिया गया।

उन्होंने अदालती आदेश का उल्लंघन किया…
इससे पूर्व बुधवार को हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव में देरी को लेकर नाराजगी जताई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व अन्य की याचिका के संबंध में राज्य सरकार की ओर से पेश प्रार्थना पत्र पर बुधवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-क के तहत राज्य निर्वाचन आयुक्त चुनाव के मामले में अदालती आदेश का पालन करवाने के लिए बाध्य थे। प्रथम दृष्टया लगता है, उन्होंने अदालती आदेश का उल्लंघन किया है।

14 अगस्त तक पेश होगी रिपोर्ट
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि हाईकोर्ट ने 22 मई को राज्य निर्वाचन आयोग को ग्राम पंचायतों तथा नगर निकायों के चुनाव 31 जुलाई तक करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

आयोग ने 3 जुलाई को सरकार को बताया कि सर्वे कार्य 23 जुलाई तक पूरा होगा और 14 अगस्त तक रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी।

सरकार ने रखा अपना पक्ष
1- राजनीतिक आरक्षण का निर्धारण संवैधानिक एवं न्यायिक मानकों के अनुरूप किया जाना आवश्यक है, इसलिए प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग रहा है।
2- राज्य की लगभग 50 प्रतिशत जनसंख्या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है।

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