बिना ठोस आधार दोबारा मांगी जमानत, हाईकोर्ट सख्त; न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर लगाया जुर्माना

Editor
3 Min Read
बिना ठोस आधार दोबारा मांगी जमानत, हाईकोर्ट सख्त; न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर लगाया जुर्माना
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

चंडीगढ़.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बिना किसी नए और ठोस आधार के दूसरी बार अग्रिम जमानत मांगने वाले एक आरोपित की याचिका खारिज करते हुए उस पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि परिस्थितियों में किसी वास्तविक बदलाव के बिना लगातार याचिकाएं दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इससे न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ पड़ता है।

जस्टिस विनोद एस भारद्वाज ने घनश्याम जायसवाल द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश सुनाया। याचिकाकर्ता ने सोहाना थाना, जिला एसएएस नगर (मोहाली) में दर्ज धोखाधड़ी एवं अन्य धाराओं के मामले में अग्रिम जमानत की मांग की थी। इससे पहले भी उसकी अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट 23 अप्रैल 2026 को खारिज कर चुका था।

ठोस जानकारी नहीं कर पाए पेश
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि पहली याचिका खारिज होने के बाद ऐसी कौन-सी नई परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं, जिनके आधार पर दूसरी अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई योग्य मानी जा सके। हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से कोई ऐसा ठोस बदलाव अदालत के समक्ष नहीं रखा जा सका। हाई कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसलों और डिवीजन बेंच के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि केवल औपचारिक या महत्वहीन बदलावों के आधार पर दूसरी या लगातार अग्रिम जमानत याचिका दायर नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि सह-आरोपी की गिरफ्तारी, किसी अन्य आरोपी को जमानत मिलना, नए दस्तावेज पेश करना या बीमारी जैसे कारण स्वत बदली हुई परिस्थितियां नहीं माने जा सकते।

न्यायिक प्रक्रिया का हुआ दुरुपयोग
अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी आरोपी ने पहले जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान राहत न मिलने की आशंका के कारण उसे वापस ले लिया हो, तो बाद में उसी आधार पर दोबारा राहत मांगने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्ता ने बिना किसी वास्तविक परिवर्तन के दूसरी याचिका दायर कर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन लायर्स फैमिली वेलफेयर फंड, चंडीगढ़ में जमा कराई जाए।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *