हरियाणा में अंशकालिक कर्मचारियों की पुरानी पेंशन पर हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश

Editor
5 Min Read

चंडीगढ़.

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अंशकालिक आधार पर काम करने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राहत दी है। अदालत ने कहा कि नियमित होने से पहले अंशकालिक, दैनिक वेतन या तदर्थ आधार पर की गई निरंतर सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल किया जाएगा।

इससे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने जगदीश व अन्य की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि सरकारी स्कूलों में नियमित होने से पहले की गई सेवा पेंशन की गणना में जोड़ी जाए। उन्होंने ओपीएस के तहत पेंशन, सेवानिवृत्ति उपदान और अन्य वित्तीय लाभ देने तथा नई पेंशन योजना के खातों के स्थान पर सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खाते खोलने की मांग भी की थी।

रिट याचिका खारिज
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना देने के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के आदेश के खिलाफ PGIMER, चंडीगढ़ द्वारा दायर रिट याचिका खारिज की। कर्मचारियों को 1994 में वर्क-चार्ज मोर्टार मेट के रूप में नियुक्त किया गया और केवल 2016 में नियमित किया गया। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की खंडपीठ ने कहा कि 1 जनवरी 2004 को नई पेंशन योजना लागू होने से पहले नियुक्त कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना का हकदार है, भले ही उस तारीख के बाद नियमितीकरण हुआ हो। खंडपीठ ने PGIMER की उन आपत्तियों को भी खारिज किया कि कर्मचारियों को आकस्मिक निधि से भुगतान किया गया और कोई स्वीकृत पद मौजूद नहीं था।

कोर्ट ने कहा,"…एक बार जब नियुक्ति तीन दशकों की अवधि तक जारी रहती है तो केवल यह कि याचिकाकर्ता उत्तरदाताओं को आकस्मिक निधि से भुगतान कर रहे थे, पुरानी पेंशन योजना के तहत इलाज किए जाने के प्रतिवादियों के दावे को खारिज नहीं किया जाएगा।" कर्मचारियों को जनवरी और जून 1994 के बीच अस्थायी/कार्य-प्रभारित मोर्टार मेट के रूप में नियुक्त किया गया। उन्हें नियमित वेतनमान में रखा गया और नियुक्ति की तारीख से वार्षिक वेतन वृद्धि प्राप्त हुई। हालांकि, पहले छह महीने के लिए काम पर लगाया गया, लेकिन काम मौजूद होने के कारण उन्होंने काम करना जारी रखा और 6 अगस्त, 2016 के एक निर्णय के तहत उनकी सेवाओं को नियमित कर दिया गया। PGIMER ने नियमितीकरण के बाद उन्हें पुरानी पेंशन योजना का विस्तार करने से इनकार किया। CAT ने हरबंस लाल बनाम पंजाब राज्य (सीडब्ल्यूपी-2371-2010, 31 अगस्त 2010 को निर्णय) पर भरोसा करते हुए 9 सितंबर, 2025 को उनके मूल आवेदन की अनुमति दी। PGIMER ने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

PGIMER ने माना कि कर्मचारी वार्षिक वेतन वृद्धि के साथ नियमित वेतनमान में थे। हालाँकि, यह तर्क दिया गया कि कार्य-प्रभारित कर्मचारियों के रूप में उन्हें आकस्मिक निधि से भुगतान किया गया, इसलिए पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं हो सकती थी। इसने आगे तर्क दिया कि 2016 में जब कर्मचारियों को नियमित किया गया तब मोर्टार मेट का कोई स्वीकृत पद नहीं था, इसलिए ट्रिब्यूनल उन्हें पुरानी पेंशन योजना नहीं दे सकता। न्यायालय ने कहा कि कई तथ्य निर्विवाद हैं और कर्मचारियों ने 1994 से वेतन वृद्धि के साथ नियमित वेतनमान में 32 वर्षों तक लगातार काम किया, उन्हें 2016 में नियमित किया गया और उनमें से दो सेवानिवृत्त हो गए। कोर्ट ने हरबंस लाल पर भरोसा किया, जिसमें डिवीजन बेंच ने कहा कि जिस कर्मचारी की सेवा 1 जनवरी 2004 से पहले शुरू हुई, उसे उस तारीख से पहले सरकारी सेवा में माना जाएगा, भले ही बाद में नियमित किया गया हो। ऐसा कर्मचारी नई परिभाषित अंशदान पेंशन योजना द्वारा शासित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 की एसएलपी संख्या 4769 में हरबंस लाल को सही ठहराया था।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live