इंदौर में 182 हरे-भरे पेड़ों की कटाई को हाई कोर्ट की सशर्त मंजूरी, हजारों पक्षी होंगे प्रभावित

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इंदौर

 रानी सराय परिसर के 182 हरे-भरे पेड़ों पर रह रहे हजारों परिंदों का घरौंदा उजड़ना तय है। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इन पेडों को काटने की सशर्त अनुमति मेट्रो कॉर्पोरेशन को दी। पेड़ों की कटाई पक्षी विशेषज्ञों की देखरेख में चरणबद्ध तरीके से ही हो सकेगी।

मेट्रो कॉर्पोरेशन को इन पेड़ों के काटने के एवज में 2500 पौधे रोपने होंगे। इन पौधों की देखभाल करना होगी और पौधों की स्थिति बताते हुए एक साल के भीतर रिपोर्ट पेश करना होगी। इसके बाद हर साल अप्रैल में गूगल इमेज के साथ पौधों की प्रगति रिपोर्ट हाई कोर्ट रजिस्ट्री में प्रस्तुत करना होगी। कोर्ट ने मेट्रो के अलॉइनमेंट में किसी भी तरह के बदलाव से इंकार कर दिया है।

मेट्रो का भूमिगत स्टेशन प्रस्तावित है
रीगल तिराहे के पास रानी सराय परिसर में मेट्रो का भूमिगत स्टेशन प्रस्तावित है। इसके लिए परिसर में लगे 182 पेड़ों को काटा जाना है। पेडों की कटाई के विरोध में दो जनहित याचिकाएं हाई कोर्ट में चल रही थीं। कोर्ट ने इन दोनों याचिकाओं में बहस सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था जो शुक्रवार को जारी हुआ।

चरणबद्ध तरीके से पेड़ों की छंटाई-कटाई करें
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की युगलपीठ ने मेट्रो रेल लाइन के अलॉइनमेंट को लेकर पूर्व में दिए फैसले का हवाला देते हुए इसमें हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। परिसर में लगे 182 पेड़ों पर रह रहे हजारों पक्षियों के आवास की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मेट्रो प्रशासन से कहा है कि वह पक्षी विशेषज्ञों की देखरेख में ही चरणबद्ध तरीके से पेड़ों की छंटाई-कटाई करे।

पेड़ों के काटे जाने से उनका आशियाना उजड़ जाएगा
जनहित याचिका प्रियांशु जैन दायर की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट लवेश सारस्वत और एडवोकेट अभिनव धनोडकर पैरवी कर रहे थे। याचिकाओं में कहा था की रानी सराय में लगे पेड हजारों तोते और अन्य पक्षियों का आशियाना है। इन पेड़ों के काटे जाने से उनका आशियाना उजड़ जाएगा। संस्था नेचर वालंटियर्स सोसाइटी ने हस्तक्षेपकर्ता के रूप में एक याचिका दायर की थी। उनकी ओर से तर्क रखा गया कि रानी सराय परिसर में रोज रिंग्ड प्रजाति के तोते वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत संरक्षित हैं और इनको नुकसान पहुंचाना कानून विरुद्ध है।

अन्य वैकल्पिक स्थान सुझाए थे
संस्था ने मेट्रो स्टेशन को रीगल टॉकीज, गांधी हाल या प्रीतमलाल दुआ सभागृह की खाली जमीन पर शिफ्ट करने का सुझाव भी दिया था। हालांकि मेट्रो कॉर्पोरेशन ने इसका विरोध करते हुए तर्क रखा था कि 7500 करोड़ से ज्यादा की लागत वाली इंदौर मेट्रो परियोजना का अलॉइनमेंट दिल्ली मुख्यालय से स्वीकृत हुआ है। केंद्र व राज्य शासन से जरूरी अनुमतियां ली जा चुकी हैं। निजी संपत्तियों को नुकसान से बचाने के लिए स्टेशन की मानक लंबाई 180 मीटर से घटाकर 150 मीटर की गई है, इसे किसी अन्य स्थान पर और छोटा करना संभव नहीं है।

ढाई हजार पौधे लगाएंगे
मेट्रो कॉर्पोरेशन ने कोर्ट को यह भी बताया कि 182 पेड़ों की कटाई के बदले 2,500 पौधे लगाए जाएंगे। हाई कोर्ट में पूर्व में राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से पेश याचिका पर मेट्रो के अलॉइनमेंट को यथावत रखने के संबंध में दिए फैसला भी प्रस्तुत किया।

कोर्ट ने भी किया था निरीक्षण
सुनवाई के दौरान 29 सितंबर 2026 को न्यायमूर्तिगण ने स्वयं स्थल निरीक्षण किया था। उन्होंने रानीसराय में पेड़ों पर पक्षियों के विशाल झुंड देखे थे। कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि कानून का स्वीकृत सिद्धांत है कि, जो काम प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जा सकता, उसे अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं किया जा सकता।

मेट्रो स्टेशन का स्थान बदलने से पूरा अलाइनमेंट बदल जाएगा, लेकिन हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के चलते इस मामले में दोबारा विचार नहीं किया जा सकता। अदालत ने पूर्व निर्णय के प्रति निष्ठा के सिद्धांत के चलते मेट्रो मार्ग में हस्तक्षेप करने से असमर्थता जताई। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मेट्रो कॉर्पोरेशन को पूर्व निर्णय की जानकारी पहले ही दे देनी चाहिए थी, जिससे कोर्ट का बहुमूल्य समय बचता। हालांकि कोर्ट ने पक्षियों को होने वाली असुविधा को देखते हुए पेड़ कटाई को लेकर निर्देश के साथ याचिका समाप्त कर दी।

पेड़ कटाई के लिए इन निर्देशों का करना होगा पालन
    पेड़ों को एक साथ नहीं काटा जाएगा। छंटाई व कटाई का काम कम से कम दो पक्षी विज्ञानियों या विशेषज्ञों की देखरेख में चरणबद्ध तरीके से करना होगा ताकि पक्षियों को आसपास के अन्य पेड़ों पर जाने का समय मिल सके।

    पद्मश्री भालचंद्र मोंढ़े जो कि खुद पक्षी विशेषज्ञ हैं उनकी ओर उनकी सलाह पर अन्य पक्षी विशेषज्ञों की मदद इसमें ली जा सकती है।

    पेड़ों की छंटाई के दौरान मौके पर वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू टीम जाली और मेडिकल किट के साथ मौजूद रहेगी ताकि घायल पक्षियों या घोंसले से गिरे पक्षियों और उनके बच्चों की रक्षा की जा सके।

    मेट्रो प्रशासन को शपथ पत्र के अनुसार 2500 पौधे रोपना होंगे। इसकी देखभाल करना होगी और पालन प्रतिवेदन पहले एक वर्ष के भीतर और फिर प्रतिवर्ष अप्रैल में गूगल इमेज के साथ हाई कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी।

    जिन पक्षी विशेषज्ञों की निगरानी में पेड़ों की कटाई की जाएगी, उन्हें दस हजार रुपये प्रति विशेषज्ञ मानदेय दिया जाए।

 

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