चूल्हे-चौके से बिजनेस तक गायत्री समूह की 12 महिलाओं ने टेंट हाउस के जरिए लिखी सफलता की नई दास्तां

Editor
4 Min Read
चूल्हे-चौके से बिजनेस तक गायत्री समूह की 12 महिलाओं ने टेंट हाउस के जरिए लिखी सफलता की नई दास्तां
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

सफलता की कहानी 

चूल्हे-चौके से बिजनेस तक गायत्री समूह की 12 महिलाओं ने टेंट हाउस के जरिए लिखी सफलता की नई दास्तां

आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मिसाल बना गायत्री महिला स्व-सहायता समूह

रायपुर
आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल स्वयं सहायता समूहों  और सरकारी योजनाओं से जुड़कर अपने भाग्य को बदलने वाली ग्रामीण महिलाएं हैं। महिलाओं की संघर्ष यह दर्शाती है कि आत्मनिर्भरता से न केवल आर्थिक स्थिति सुधरती है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और निर्णय लेने का अधिकार भी मिलता है। जहाँ महिलाएं घर से निकलकर उद्यमी बन रही हैं, आत्मनिर्भर भारत का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। 

               छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र स्थित ग्राम कर्रा (हि.) की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो सफलता कदम चूमती है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर न केवल आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त किया है, बल्कि समाज के सामने सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण भी पेश किया है।  ये मिसालें साबित करती हैं कि कौशल विकास, आत्मविश्वास, और वित्तीय स्वतंत्रता जैसे मुद्रा ऋण से महिलाएं न केवल अपने परिवार को बल्कि समाज को भी मजबूत कर रही हैं। 

कुशल नेतृत्व और सरकारी योजनाओं का संगम

             श्रीमती गौरी यादव (अध्यक्ष) और श्रीमती पांचो श्रीवास (सचिव) के कुशल नेतृत्व में संचालित इस 12 सदस्यीय समूह को शासन की योजनाओं से संबल मिला । बिहान योजना से  6 लाख रुपये का ऋण और एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग से 4 लाख रुपये का ऋण। कुल निवेश 10 लाख रुपये की राशि से महिलाओं ने “श्री राम टेंट हाउस” के नाम से अपने उद्यम की शुरुआत की।

विस्तार और सेवाएँ- एक सफल बिजनेस मॉडल

             वर्ष 2025 में रामनवमी के अवसर पर शुरू हुआ यह व्यवसाय आज एक विशाल रूप ले चुका है। वर्तमान में समूह के पास निम्नलिखित संसाधन उपलब्ध हैं। 30×30 फीट का मंच, 60×120 फीट का विशाल पंडाल, 60 टेबल, 500 कुर्सियां और 10 जम्बो कूलर है। वैवाहिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन, शोक सभा और शासकीय शिविरों (जैसे- श्सुशासन तिहारश् और जनसमस्या निवारण शिविर) में टेंट व बर्तन आपूर्ति।

*लाभ के साथ सेवा भी और बर्तन बैंक का संचालन *

           समूह केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहा है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक कार्यों हेतु बर्तन निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। ग्रामीणों के लिए बर्तन बैंक का संचालन किया जा रहा है, जहाँ बेहद कम दरों पर सामग्री उपलब्ध है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के माध्यम से टेंट हाउस की सेवा गाँव.गाँव पहुँचाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा है।

10 लाख रुपये तक पहुंची वार्षिक आय

          बेहतर प्रबंधन और कड़ी मेहनत का परिणाम यह है कि समूह की वार्षिक आय अब 10 लाख रुपये के करीब पहुंच गई है। स्थानीय प्रशासन के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी ने इनकी आय और प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि की है। समूह की महिलाओं ने आर्थिक सशक्तिकरण की इस राह को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की ये महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि जिले में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी हैं।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *