धार भोजशाला से ज्ञानवापी तक, देशभर में कहां-कहां चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद? देखें पूरी लिस्ट

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मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला के संबंध में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को बड़ी राहत दी है. कोर्ट का यह मानना है कि भोजशाला मूल रूप से एक मंदिर है. भोजशाला कमाल मौला मस्जिद विवाद की सुनवाई हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के सामने हुई. इसने पूरे भारत में चल रहे कई मंदिर मस्जिद के  विवादों पर राष्ट्रीय बहस को एक बार फिर से तेज कर दिया है. बीते कुछ सालों में देशभर की अदालतों में ऐसी याचिकाओं में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है जिनमें हिंदू संगठन और याचिकाकर्ताओं ने यह दावा किया है कि प्राचीन मंदिरों को तोड़कर कथित तौर पर मस्जिद या फिर दरगाह बनाई गई थीं. आइए जानते हैं उन सभी विवादों के बारे में। 

ज्ञानवापी मस्जिद मामला 
   धार भोजशाला को कोर्ट ने मंदिर माना, हिंदू पक्ष को मिली राहत।
    ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में ASI सर्वे, पूजा की अनुमति मिली।
    मथुरा कृष्ण जन्मभूमि, संभल-लखनऊ मस्जिद पर भी चल रहे विवाद।
    पूजा स्थल अधिनियम 1991 इन मामलों में बड़ी कानूनी बाधा।
    अजमेर दरगाह, कुतुब मीनार पर भी हिंदू मंदिरों पर निर्माण के दावे।

इस समय चल रहे सबसे चर्चित विवादों में से एक वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा है. हिंदू पक्ष का यह कहना है कि मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ दिया गया था और उसके बाद उसी जगह पर मस्जिद बनाई गई थी। 

यह मामला तब और तेज हो गया जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के एक सर्वे में कथित तौर पर मस्जिद परिसर के नीचे एक बड़े हिंदू मंदिर से जुड़े अवशेष, खंभे, नक्काशी और ढांचागत सबूत मिले. अदालत ने परिसर के अंदर व्यास जी का तहखाना क्षेत्र में हिंदू पूजा पाठ की भी अनुमति दे दी है. इससे यह विवाद इस समय न्यायपालिका के सामने मौजूद सबसे संवेदनशील धार्मिक मामलों में से एक बन गया है। 

मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि 
एक और बड़ी कानूनी लड़ाई श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद के आसपास चल रही है. याचिकाकर्ताओं का यह दावा है कि ईदगाह का निर्माण प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़ने के बाद किया गया था. इसे भगवान कृष्ण का जन्म स्थान माना जाता है. मस्जिद के ढांचे को हटाने और उस जगह का वैज्ञानिक सर्वे करने की मांग वाली कई याचिका इस समय इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित हैं. अयोध्या और ज्ञानवापी के बाद यह मामला सबसे बड़े धार्मिक संपत्ति विवादों में से एक बनकर उभरा है। 

संभल और लखनऊ मस्जिद विवाद 
शाही जामा मस्जिद विवाद भी तब विवादों में आ गया जब यह दावा सामने आया की मस्जिद का निर्माण श्री हरिहर मंदिर के ऊपर किया गया था. यह मंदिर कल्कि पूजा परंपराओं से जुड़ा है. एक स्थानीय अदालत के आदेश के बाद एक एडवोकेट कमिश्नर ने मस्जिद परिसर का सर्वे किया. इस पर मुस्लिम पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। 

इसी तरह टीला वाली मस्जिद के मामले में भी कानूनी कार्रवाई चल रही है. हिंदू याचिकाकर्ताओं का यह तर्क है कि यह ढांचा लक्ष्मण टीला पर स्थित प्राचीन शेषनागेश्वर तिलेश्वर महादेव मंदिर के ऊपर बना है. वैज्ञानिक सर्वे और मंदिर की बहाली की मांग वाली याचिकाएं अभी विचाराधीन हैं। 

अजमेर दरगाह और कुतुब मीनार का मामला 
राजस्थान में अजमेर शरीफ दरगाह और उसके पास स्थित अढ़ाई दिन का झोपड़ा को लेकर याचिकाएं दायर की गई हैं. हिंदू संगठनों का यह दावा है कि इन ढांचों का निर्माण प्राचीन हिंदू धार्मिक और शैक्षणिक परिसरों को तोड़कर किया गया था और वह भगवान शिव की पूजा और संस्कृत शिक्षा से जुड़े थे। 

इसी के साथ दिल्ली में कुतुब मीनार परिसर के अंदर स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद से जुड़ी याचिकाएं लगातार कानूनी ध्यान आकर्षित कर रही हैं. याचिकाकर्ता अक्सर उन शिलालेखों का हवाला देते हैं जिनमें कथित तौर पर यह जिक्र है कि मस्जिद के निर्माण में 27 हिंदू और जैन मंदिरों की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। 

क्या है सबसे बड़ी कानूनी बाधा? 
इन सब मामलों में पूजा स्थल अधिनियम 1991 सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है. यह कानून किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को बदलने पर रोक लगाता है, जैसा कि वह 15 अगस्त 1947 को मौजूद था. हालांकि अदालतें इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या विवादित धार्मिक ढांचे के ऐतिहासिक स्वरूप का सर्वे और जांच करना इस अधिनियम के तहत कानूनी रूप से लीगल है या फिर नहीं। 

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