जालंधर में बिना लाइसेंस चल रहे विदेश यात्रा कंसल्टेंट के 4-4 ऑफिस, प्रशासन पर उठे सवाल

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जालंधर में बिना लाइसेंस चल रहे विदेश यात्रा कंसल्टेंट के 4-4 ऑफिस, प्रशासन पर उठे सवाल
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जालंधर.

विदेश यात्रा कंस्ल्टैंट्स (छोटी बारादरी) का मालिक बिना लाइसैंस के चार-चार ऑफिस चला रहा था और इसका प्रशासन को पता तक नहीं लगा। यह लापरवाही है या फिर अनदेखी लेकिन विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक पिछले चार सालों से लोगों को ठग रहा था।

विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के खिलाफ एंटी फ्रॉड में ही 60 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं लेकिन अभी तक कोई एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुई। सूत्रों की मानें तो विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स ने गढ़ा रोड पर ही नहीं बल्कि सहदेव मार्कीट के पास भी ऑफिस खोल रखा था। इसके अलावा ग्रैंड मॉल में उसके दो दफ्तर हैं जिसमें से 5वीं मंजिल पर बनाया गया ऑफिस तो आलीशान था जबकि एक आफिस तीसरी मंजिल पर था। बताया है कि बी.एम.सी. चौक के पास भी विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के नाम पर दफ्तर चला रहा है।

प्रशासन की लापरवाही के चलते विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक ने सैंकड़ों लोगों के साथ विदेश भेजने के नाम पर फ्रॉड किया। करतारपुर का रहने वाला विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक उन्हीं पैसों से शहर के पॉर्श इलाके माडल टाऊन में करीब अढ़ाई करोड़ की कोठी बनाई है। इस तथा कथित एजैंट खिलाफ अपराधिक केस दर्ज हैं जिसके बारे भी जल्द खुलासा किया जाएगा। इसकी गाड़ी नंबर 3131 और अदिति नाम की करीबी महिला दोस्त भी काफी चर्चित रह चुकी है। गौरतलब है कि विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स नाम से संचालित यह संस्था बिना लाईसेंस के सोशल मीडिया का सहारा लेकर विदेश भेजने का लालच देकर भोले-भाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है और फिर उन्हीं लोगों को ठगी का शिकार बना लिया जाता है।

वर्क परमिट के लिए ज्यादा पैसे वसूल
विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक इतना शातिर था कि वह अपने क्लाइंट से वीजा लगवाने के लिए ज्यादा पैसे लेकर कम पैसों का एफिडेविट देता था। काम न होने पर अगर क्लाइंट पुलिस को शिकायत भी देता था कि वह क्लाइंट को कुछ पैसों देकर शिकायत ही खत्म करवा देता था जबकि पुलिस भी लिखित में प्रूफ होने की बात कह कर ज्यादा गंभीरता से मामले को नहीं लेती थी। सूत्रों की मानें तो विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स में गया अगर क्लाइंट मलेशिया में वर्क परमिट के लिए अप्लाई करता था तो उससे डेढ़ लाख रुपए लिए जाते थे, लेकिन एफिडेविट पर वही राशि 40 हजार रुपए लिखी जाती थी। पहले तो क्लाइंट को वीजा आने का भरोसा दिया जाता था जिससे क्लाइंट भी उस एफिडेविट पर साइन कर देता था और अगर काम नहीं होता था तो शिकायत देने पर एफिडेविट के हिसाब से विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स का मालिक 40 हजार रुपए लौटा देता था और काफी शातिर तरीके से 1.10 लाख रुपए हड़प जाता था।

जिसने काम में एंट्री दिलाई, उसी से कर चुका फ्रॉड
सूत्रों ने बताया कि विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक को नरिंदर सिनेमा के पास पड़ते एक इमीग्रेशन के मालिक ने इस काम में एंट्री दिलाई थी। विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक को इस काम की कोई जानकारी नहीं थी, जिसके चलते इमीग्रेशन के मालिक ने उसे अपने साथ जोड़ा और सारा काम सिखाया। काफी समय से वह दोनों एक साथ काम करते रहे लेकिन बाद में विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक ने अपने गुरु को ही ठग लिया और फिर अपना बिजनेस शुरू कर दिया। वहीं विदेश यात्रा कंसल्टेंट्स के मालिक द्वारा किए अपराधों की लिस्ट लंबी है।

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