गुरदासपुर में बाढ़ का खतरा बढ़ा, पहाड़ों में बादल फटने से रावी दरिया के उफान की आशंका

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गुरदासपुर.

हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू कश्मीर के हिमाचल प्रदेश के साथ लगते पहाड़ी ईलाकों में हो रही जोरदार बरसात तथा बादल फटने की घटनाओं के चलते रावी दरिया में कब बाढ़ आ जाए किसी को पता नही होता है। कई बार तो रात के समय में ही रावी दरिया में इतना अधिक पानी आ जाता है कि जिला गुरदासपुर के रावी दरिया किनारे बसे गांवों को भारी मुश्किल का सामना करना पड़ जाता है।

परंतु इस सबके बावजूद संबंधी ड्रनेज विभाग द्वारा बाढ़ से निपटने के लिए जरूरत अनुसार प्रबंध नही किए गए है। जिस कारण सीमा पर बसे गांवों के लोग भय के वातावरण में समय व्यतीत कर रहे हैं।
रावी दरिया वैसे तो हिमाचल प्रदेश से रंजीत सागर डैम तथा उसके बाद शाहपुर कंडी डैम के रास्ते माधोपुर हैडवर्कस से आगे जिला पठानकोट तथा जिला गुरदासपुर की सीमा में प्रवेश करता है। रावी दरिया जब जिला पठानकोट की सीमा में प्रवेश करता है तो जैनीपुर के पास उसमें जम्मू कश्मीर राज्य से आने वाला उज्ज दरिया सहित शिंगारवां भी मिलता है। जबकि कुछ स्थानिय नाले भी रावी दरिया में मिलते तैं। जबकि जिला गुरदासपुर में प्रवेश करने पर इस दरिया में पानी का बहाव बहुत अधिक तथा तेज हो जाता है। क्योंकि उज्ज तथा शिंगरावां दरिया का पानी भी इसमें मिल जाता है। जिस कारण जैनीपुर के पास स्थिति बहुत खराब हो जाती है। इस स्थान पर विभाग ने बाढ़ सुरक्षा प्रबंध बना रखे हैं,पंरतु पानी के आगे कुछ भी टिकता नही है। यही कारण है कि जिला गुरदासपुर में रावी दरिया बहुत ही खतरनाक स्थिति में बहता है। मकोड़ा पत्तन के पास रावी दरिया में बाढ़ की स्थिति में पानी का बहाव इतना अधिक होता हे कि किशती भी दरिया में नही डाली जाती है।

जैनीपुर डैम भी अभी अनिश्चिता के वातावरण में है
भारत सरकार ने रावी दरिया का पानी पाकिस्तान में जाने से रोकने के लिए पहले रावी दरिया पर रंजीत सागर डैम बनाया,फिर शाहपुर कंडी डैम बनाया है,जो शुरू होने वाला है। डैम के पीछे बनी झील में पानी भरने का काम शुरू हो चुको है। परंतु उसके बावजूद बरसात के मौसम में रावी दरिया से निकास हुए तथा स्थानिय नालों के पानी को रोकने के लिए जैनीपुर के पास यह लगभग 400 करोड़ रूपये की लागत से डैम बनाने की योजना तैयार की गई थी। जहां पर डैम बना कर एक तो रावी दरिया के पानी को रोका जाना है,वही डैम पर एक सडक़ बना कर दरिया पार बसे गांवों के लिए रास्ता भी बनाया जाता है। इस संबंधी सभी कारवाई पूरी होने सहित सभी तरह की मंजूरी मिलने के बावजूद इस डैम का काम कई सालों से शुरू नही किया जा रहा है। जिस कारण बरसात के दिनों के बाढ़ का खतरा रावी दरिया के किनारे बसे गांवों के लिए बना रहता है।

धुस्सी बांध भी बाढ़ को नही रोक पाता
रावी दरिया में हर साल आने वाली बाढ़ संबंधी संबंधित विभाग ने बहुत पहले रावी दरिया के भारतीय ईलाके की तरफ के किनारे पर एक विशाल धुस्सी बांध बना रखा है। जिसका मुख्य काम दरिया के पानी को धुस्सी बांध से आगे आने से रोकना है। परंतु गुज्जरों तथा किसानों द्वारा धुस्सी बांध के रास्ते धुस्सी बांध के आगे के ईलाकों में अपने खेतों में जाने के लिए धुस्सी बांध पर से रास्ते बना रखे हैं। जो धुस्सी बांध को नुकसान पंहुचाते हैं तथा बाढ़ आने पर इस स्थानों से धुस्सी बांध टूट जाता है।

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