हरियाणा में आधार सत्यापन के बाद ही मिलेगा खाद, पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला

Editor
3 Min Read
हरियाणा में आधार सत्यापन के बाद ही मिलेगा खाद, पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

पंचकूला.

पश्चिम एशिया में छाए युद्ध संकट को देखते हुए किसानों को दी जाने डीएपी और यूरिया तथा अन्य उर्वरक की वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही है। कालाबाजारी नहीं हो इसके लिए नई प्रणाली में क्यूआर कोड और आधार सत्यापन को अनिवार्य किया जा रहा है।

हरियाणा में यह योजना उत्तर प्रदेश से सटे यमुना नगर तथा राजस्थान से सटे रेवाड़ी तथा महेंद्रगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। इसके लिए किसानों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों खाद विक्रेताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले इन जिलों को इसलिए चुनाव किया गया कि डीएपी और यूरिया वितरण करनें में शिकायत अधिक आ रही थी। दस्तावेज हरियाणा के किसानों के लगाकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश में डीएपी यूरिया बेंच दी जाती थी। प्रदेश सरकार यही व्यवस्था अगले चरण् में पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी में है।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय तथा कृषि एवं कल्याण ने फ्रेम वर्क फार फर्टिलाइजर सेल के नाम से नई डिजिटल खाद प्रणाली तैयार की है। इसके ही तहत हरियाणा के तीन जिला चुने गए हैं। यह कदम युद्ध संकट के चलते उर्वरक का आयात प्रभावित होने के चलते किया गया है। नई व्यवस्था आरंभ होने पर किसानों को पहले अपने मोबाइल एप के जरिए अग्रिम बुकिंग करनी होगी। किसान को अपनी फसल और जमीन की जानकारी दर्ज करनी होगी। बुकिंग पूरी होने पर किसान को क्यूआर कोड आधारित टोकन जारी होगा। जब किसान खाद लेने जाएगा तो डीलर पीओएस मशीन से क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। इसके बाद आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन होने पर ही खाद देगा। प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा पहले ही यह कह चुके हैं कि कालाबाजारी रोकने के लिए नया सिस्टम अपनाया जा रहा है। इस योजना के लिए भी जल्द गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी।

इस व्यवस्था से किसानों को भटकना नहीं पड़ेगा और डीलर के पास मौजूदा स्टाक की रियल टाइम मानिटरिंग भी हो जाएगी। कोड स्कैन नहीं होने पर किसान को आइडी आधार नंबर और आवेदन नंबर के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नई व्यवस्था में यह विकल्प इसलिए दिया गया है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नही हो।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *