कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल हुई महिला टीचर निलंबित, हरियाणा शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई

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कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल हुई महिला टीचर निलंबित, हरियाणा शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई
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रोहतक
 हरियाणा के रोहतक जिले के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत एक अतिथि शिक्षिका को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले सप्ताह हुए एक प्रदर्शन में शामिल होने के कुछ दिनों बाद निलंबित कर दिया गया है। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित किया गया था। जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने  शिक्षिका सुलेखा दलाल को आठ जून से निलंबित करने का आदेश जारी किया। हालांकि आदेश में निलंबन का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

खुद को बताया था कॉकरोच की मां
आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान रोहतक खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय उनका मुख्यालय रहेगा और उन्हें बिना पूर्व अनुमति के वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। गौरतलब है कि एक वीडियो क्लिप में दलाल को जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के प्रदर्शन के बोलते हुए देखा गया था। वीडियो में कथित तौर पर उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि यह लड़ाई है। इस बार ‘करो या मरो’ की लड़ाई है। अब ‘कॉकरोच की मां’ मैदान में उतर चुकी है। हम किसी समूह का हिस्सा नहीं हैं, हम अपने बच्चों के साथ हैं। एक मां पूरे देश की मां होती है।

क्या बोली टीचर

    निलंबन को लेकर पूछे जाने पर दलाल ने कहा कि उन्हें इसके कारण की जानकारी नहीं है।
    उन्होंने कहा कि मैं कई वर्षों से काम कर रही हूं। मुझे यह नहीं पता था कि वहां (प्रदर्शन में) शामिल नहीं हुआ जा सकता।
    मुझे लगता है कि निलंबन से पहले मुझे कारण बताया जाना चाहिए था।
    शिक्षिका ने बताया कि उनके स्नातक पुत्र ने उस भर्ती परीक्षा में भाग लिया था, जिसमें कथित अनियमितताएं सामने आई हैं।
    उन्होंने कहा कि इसलिए मेरा बेटा और एक अभिभावक के रूप मैं प्रभावित हैं।

मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं
उन्होंने कहा कि मैं वहां केवल एक चिंतित मां के रूप में गई थी। मैंने जो कहा, वह एक मां का दर्द था। मेरा किसी पार्टी या संगठन से कोई संबंध नहीं है। उल्लेखनीय है कि अतिथि शिक्षक की नियुक्ति सरकार द्वारा अस्थायी रिक्तियों को भरने के लिए अनुबंध के आधार पर की जाती है। सीजेपी का प्रदर्शन छह जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ था, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों और युवाओं ने कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग की थी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह समूह हाल के हफ्तों में परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया अभियानों के जरिए चर्चा में आया है और खुद को शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग करने वाला युवा मंच बताता है।

 

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