बंगाल की पहली बीजेपी सरकार के शपथ में भावनाएं, सम्मान और राजनीतिक संदेश

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 नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 90 साल के एक बीजेपी सदस्य के पैर छूना फिर ब्रिगेड ग्राउंड में उमड़ी भीड़ के सामने आभार जताते हुए घुटनों के बल बैठ जाना, मंच के बैकग्राउंड में देवी दुर्गा की तस्वीर और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का गेरुआ (भगवा) कुर्ता पहने होना… पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कई तरह के प्रतीकों से भरा हुआ था।

अगर बंगाल विधानसभा चुनावों ने इतिहास रचा तो बीजेपी ने अपनी पहली सरकार के शपथ ग्रहण के मौके पर इस इतिहास को बनाने में योगदान देने वाले हर पहलू को खास तौर पर सम्मान दिया।

भावनात्मक पहलू
इस पल का भावनात्मक महत्व साफ झलक रहा था। शपथ लेने के बाद सीएम सुवेंदु ने पीएम मोदी के सामने सिर झुकाया और कुछ देर तक उसी झुकी हुई मुद्रा में रहे, जबकि पीएम ने एक हाथ से उनके जुड़े हुए हाथों को थाम लिया और दूसरे हाथ से मुस्कुराते हुए उनकी पीठ थपथपाई।

फिर भीड़ के शोर के बीच उन्होंने सुवेंदु को कसकर गले लगा लिया। सुवेंदु ने गणमान्य व्यक्तियों की कतार के बीच गृह मंत्री अमित शाह के प्रति भी ऐसा ही सम्मान दिखाया।
सुवेंदु पर शाह का भरोसा

2020 में शाह की मौजूदगी में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद से गृह मंत्री ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ बीजेपी के जमीनी विरोध का नेतृत्व करने के लिए सुवेंदु का पूरा समर्थन किया। यह एक ऐसा भरोसा था जिसका फल मिला। लेकिन यह ऐतिहासिक अवसर उन पुराने और अनुभवी नेताओं की लंबी मेहनत को स्वीकार करने का भी एक मौका था।

दिलीप घोष को मौका
आरएसएस के पूर्व प्रचारक और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और जिन्हें नए नेताओं के उभरने के दौर में कभी-कभी उपेक्षित महसूस हुआ था सुवेंदु के बाद शपथ लेने वाले पहले मंत्री बने। यह उनके दशकों लंबे भगवा विचारधारा के प्रति समर्पण का एक सम्मान था।

राजनीतिक हिंसा में मारे गए बीजेपी सदस्यों के परिवार से मुलाकात
पीएम मोदी ने बीजेपी के कुछ ऐसे सदस्यों के परिवार वालों से भी मुलाकात की, जिनकी कथित तौर पर पिछले कुछ दशकों में हुई राजनीतिक हिंसा में जान चली गई। बीजेपी ने जिन पांच मंत्रियों को चुना उससे यह साबित होता है कि चुनावों में पार्टी को अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गों का समर्थन मिला है।

जहां सुवेंदु ब्राह्मण हैं, वहीं घोष ओबीसी हैं; जबकि अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशित प्रमाणिक मतुआ, आदिवासी और राजबंशी समुदायों से आते हैं। एकमात्र महिला सदस्य अग्निमित्रा पॉल, कायस्थ समुदाय से हैं।

मुस्लिम समुदाय को जगह नहीं
चूंकि बीजेपी का कोई भी विधायक मुस्लिम नहीं है और राज्य में कोई विधान परिषद भी नहीं है, इसलिए सरकार में किसी मुस्लिम को जगह मिलने की संभावना बहुत कम नजर आती है। यह शायद पहला ऐसा मौका होगा जब बंगाल की किसी सरकार में मुस्लिम समुदाय को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा।

टीएमसी ने बीजेपी पर यह आरोप लगाया था कि वे बाहरी लोग हैं और उन्हें बंगाली संस्कृति की कोई परवाह नहीं है। इन आरोपों का जवाब देने के लिए बीजेपी ने खास तौर पर इस कार्यक्रम का आयोजन टैगोर की जयंती के अवसर पर किया और मंच पर इस महान बंगाली विद्वान की तस्वीर भी लगाई गई थी।

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