पटना
बिहार का शिक्षा विभाग वर्षों से मुकदमों के बोझ तले दबा जा रहा है। हाल यह है कि विभाग 10145 मुकदमों में उलझा हुआ है। हालांकि अब इसके निपटारे की कार्ययोजना बनायी जा रही है। विभाग लंबित मुकदमों में से 10 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर बिहार मुकदमा नीति के प्रावधानों के अंतर्गत उनका शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करेगा।
लंबित मुकदमों के मामले को शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इसे लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। उन्होंने कहा कि मुकदमे न केवल प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी हैं, बल्कि ये शिक्षकों, कर्मियों और आम नागरिकों के हितों से जुड़े निर्णयों में भी अनावश्यक विलंब का कारण बनते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की विशेष सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जाए। मंत्री ने 15 दिनों के भीतर दस वर्ष से अधिक पुराने मामलों की पहचान, वर्गीकरण और प्रारंभिक समीक्षा पूरी कर बिहार मुकदमा नीति के अनुरूप कार्रवाई प्रारंभ करने को कहा है।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। विभागीय स्तर पर इसकी नियमित निगरानी की जाएगी। मुकदमों के बोझ से मुक्त होने पर विभाग का समय, ऊर्जा और संसाधन सीधे तौर पर जनहितकारी कार्यों में लगाए जा सकेंगे। विद्यालयों की गुणवत्ता और आधारभूत ढांचे के विकास में, शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की लंबित समस्याओं के समाधान में तथा सरकारी शिक्षा योजनाओं के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन में इसका उपयोग हो सकेगा। इससे प्रशासनिक निर्णय-प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी।
मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार मुकदमा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से शिक्षा विभाग के मुकदमों के बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। बिहार सरकार जवाबदेह और परिणामोन्मुख प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा विभाग इस दिशा में सुशासन की एक नई नजीर पेश करेगा।
