महायुद्ध 2.0 की आहट! ईरान ने अमेरिकी हमले का जवाब देते हुए MQ-9 ड्रोन मार गिराया

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तेहरान 

खाड़ी में चल रहे बवाल के खत्म होने के आसार नजर आ ही रहे थे कि अचानक अमेरिका की ओर से हुए हमले ने एक बार फिर से खाड़ी में गोले-बारूद की आवाज गुंजा दी है. पहले अमेरिका ने दावा किया कि उसने अपनी रक्षा में दक्षिणी ईरान की नावों पर हमला किया है. इसके जवाब में अब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है. IRGC ने ये भी दावा किया हैहा कि उसने अमेरिकी RQ-4 ड्रोन और F-35 लड़ाकू विमान को ईरानी हवाई क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर कर दिया. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, IRGC ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। 

इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने खाड़ी देशों और अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अब खाड़ी क्षेत्र के देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेंगे. अल जजीरा के मुताबिक खामेनेई ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि अब अमेरिका के लिए खाड़ी क्षेत्र सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा. बकरीद के मौके पर जारी अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि समय को पीछे नहीं मोड़ा जा सकता और अब क्षेत्र के देश पहले जैसे हालात स्वीकार नहीं करेंगे. ईरानी सरकारी टीवी और AFP की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का प्रभाव पश्चिम एशिया में लगातार कमजोर हो रहा है और हर गुजरते दिन के साथ उसकी स्थिति पहले से कम होती जा रही है। 

हमलों के साथ वार्ता भी है जारी
इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध रोकने को लेकर बातचीत भी आगे बढ़ती दिख रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि 14 बिंदुओं वाले संभावित समझौता ज्ञापन पर कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, हालांकि अंतिम समझौता अभी दूर है. बताया जा रहा है कि बातचीत का मुख्य फोकस युद्ध रोकना और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटाना है. इसके बदले ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और क्षेत्र में तनाव कम करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। 

परमाणु मुद्दे पर अटकी हुई है बात
दरअसल परमाणु मुद्दा अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करे, जबकि तेहरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा. इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और हिज्बुल्लाह जैसे ईरान समर्थित समूहों को लेकर भी मतभेद जारी हैं. रॉयटर्स के मुताबिक अगर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल इस समझौते को मंजूरी देती है, तो इसे अंतिम स्वीकृति के लिए मोजतबा खामेनेई के पास भेजा जाएगा. वहीं अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि खामेनेई पहले ही इस समझौते की व्यापक रूपरेखा को समर्थन दे चुके हैं। 

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