DMK OUT, TVK IN? इंडिया गठबंधन में विजय की बढ़ती भूमिका से तमिलनाडु की राजनीति में हलचल

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DMK OUT, TVK IN? इंडिया गठबंधन में विजय की बढ़ती भूमिका से तमिलनाडु की राजनीति में हलचल
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चेन्नई 

द्रविड़ मुनेत्र कषगम(DMK) के इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने और 08 जून की बैठक का बहिष्कार करने के फैसले के बाद तमिलगा वेट्टरी कषगम(TVK) गठबंधन में डीएमके की पार्टी की जगह ले सकती है और उम्मीद है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय इस अवसर का लाभ उठाकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखें। टीवीके का कांग्रेस के साथ गठबंधन और मजबूत हो गया है, क्योंकि विजय ने अपने मंत्रिमंडल में दो मंत्री पद और एक राज्यसभा सीट देकर इसे और पुख्ता किया है जबकि वह(यह सीट अपनी पार्टी के लिए भी रख सकते थे)। अब उनकी रुचि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाने में है।

इससे पहले  कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने सचिवालय में विजय से मुलाकात की थी। कहा जा रहा है कि विजय का इंडिया गठबंधन में प्रवेश और संभवतः द्रमुक के जाने से पैदा हुए खाली स्थान को भरना इस चर्चा का मुख्य विषय था। श्री विजय की उपस्थिति उनके विशाल जनाधार को देखते हुए गठबंधन को और अधिक मजबूती प्रदान कर सकती है, क्योंकि कांग्रेस और टीवीके दोनों का एक साझा लक्ष्य धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करना है।

विजय से राहुल गांधी को भी मिलेगी ताकत
लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 08 सांसदों वाले द्रमुक का गठबंधन से अलग होना एक अस्थायी झटका हो सकता है, लेकिन विजय का इंडिया गठबंधन में शामिल होना इसे 'स्टार पावर' और एक नया आकर्षण प्रदान करेगा। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार इससे राहुल गांधी के हाथों को मजबूत करने में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा श्री गांधी और श्री विजय के बीच का विशेष बंधन आने वाले लोकसभा चुनावों में राजनीतिक परिदृश्य को बदलने में सहायक सिद्ध होगा।

विजय पहले ही तमिलनाडु के राजनीतिक नक्शे को बदल चुके हैं, और उनकी पार्टी टीवीके का लक्ष्य उस धर्मनिरपेक्ष स्थान पर कब्जा करना है, जिस पर कभी डीएमके का दावा हुआ करता था। कांग्रेस का साथ होने से उनके पास भाजपा का मुकाबला करने के लिए आवश्यक धर्मनिरपेक्ष साख मौजूद है। द्रमुक के लिए अब तक कांग्रेस ही वह पार्टी थी जिसने उसे धर्मनिरपेक्षता का आवरण प्रदान किया था। इसके अलावा श्री विजय का फिल्मी करिश्मा तमिलनाडु की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। पड़ोसी राज्य केरल में उनके प्रशंसकों की विशाल संख्या है और कुछ हद तक आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक में भी उनके प्रशंसक मौजूद हैं। चुनावों के समय कांग्रेस के लिए यह स्थिति अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

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