दिल्ली एयरपोर्ट की मानसून तैयारी: IGI पर जलभराव रोकने के लिए बड़ा तकनीकी अपग्रेड

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दिल्ली एयरपोर्ट की मानसून तैयारी: IGI पर जलभराव रोकने के लिए बड़ा तकनीकी अपग्रेड
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नई दिल्ली
देश के सबसे बड़े और व्यस्ततम एयरपोर्ट आइजीआइ की संचालन एजेंसी डायल इस बार मानसून से जुड़ी तैयारियों में कोई किंतु-परंतु या ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती।

पिछले कुछ वर्षाें में मानसून के दौरान टर्मिनल के भीतर पानी टपकने, रनवे पर जलभराव और टर्मिनल-1 के फोरकोर्ट पर हुए हादसों ने न केवल यात्रियों को परेशान किया था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरपोर्ट की साख को भी बट्टा लगाया था।

इन पुरानी फजीहतों से कड़ा सबक लेते हुए इस बार दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने एक एडवांस प्री-मानसून प्लान तैयार किया है। हालांकि, असली चुनौती इन दावों को जमीन पर उतारने की होगी।

विगत वर्षों का कड़वा अनुभव
इस बार एयरपोर्ट प्रशासन की तैयारियों में जो सख्ती और जल्दबाजी दिख रही है, उसके पीछे बीते वर्षों का कड़वा अनुभव है। पूर्व में हुई कुछ गंभीर घटनाओं ने एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए थे। दो वर्ष पूर्व मानसून की शुरुआत में टर्मिनल-1 पर हुआ हादसा सबसे ज्यादा संवेदनशील रहा, जिसने स्ट्रक्चरल मेंटेनेंस की कमियों को उजागर किया था।

वहीं, कुछ वर्ष पूर्व भारी वर्षा के दौरान रनवे और एयरसाइड एरिया में पानी भरने से उड़ानों के रूट डाइवर्ट करने पड़े थे, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हुई। इसके अलावा, पिछले वर्ष टी-1 के भीतर लाउंज एरिया में पानी टपकने की तस्वीरों ने इंटरनेट मीडिया पर खूब किरकिरी कराई थी।

यही वजह है कि इस बार डायल प्रशासन केवल रूटीन सफाई तक सीमित न रहकर बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव करने को मजबूर हुआ है।

इस बार डायल ने कागजी दावों से इतर जमीन पर कई तकनीकी बदलाव किए हैं।

टर्मिनल-1 फोरकोर्ट: यहां पहले होने वाले जलभराव और कमजोर ड्रेनेज से निपटने के लिए अत्याधुनिक साइफोनिक ड्रेनेज सिस्टम (वैक्यूम आधारित सक्शन तकनीक) और ओवरफ्लो डाउनटेक पाइप (इमरजेंसी बैकअप पाइप) लगाए गए हैं, जो पानी को छत पर जमा नहीं होने देंगे।

टर्मिनल-2 की छत: स्काईलाइट और छतों से पानी का रिसाव रोकने के लिए पूरी छत की व्यापक स्तर पर वाटरप्रूफिंग की गई है और सभी जोड़ों की बारीक मरम्मत पूरी हो चुकी है।

रनवे व एयरसाइड: विमानों के पहियों तक पानी भरने की पुरानी समस्या को खत्म करने के लिए हाई-कैपेसिटी डीवाटरिंग पंप स्थापित किए गए हैं और नालियों की सघन गाद सफाई (डीसिल्टिंग) का काम पूरा कर लिया गया है।

बैकअप और समन्वय पर विशेष जोर
इस बार डायल सिर्फ नए ड्रेनेज सिस्टम के भरोसे नहीं बैठा है, बल्कि उसने बैकअप प्लान भी तैयार किया है। आपात स्थितियों के लिए एक समर्पित क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) बनाई गई है, जो किसी भी लीकेज या जलभराव की स्थिति में तुरंत एक्शन के लिए संवेदनशील प्वाइंट्स पर 24 घंटे तैनात रहेगी।

इसके साथ ही बाहरी पानी को रोकने के लिए भी व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं। अक्सर एयरपोर्ट के आसपास बसे इलाकों का वर्षा जल बैकफ्लो मारकर एयरपोर्ट परिसर में घुस जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए डायल ने दिल्ली सरकार के साथ तालमेल बिठाकर इस बाहरी पानी को एयरपोर्ट में आने से पहले ही डाइवर्ट करने का प्लान बनाया है।

 

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