भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर निर्णायक दौर: नई दिल्ली में चार दिन की अहम वार्ता शुरू

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर निर्णायक दौर: नई दिल्ली में चार दिन की अहम वार्ता शुरू
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नई दिल्ली

 भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है, अब केवल इस डील पर ऑफिशियल मुहर लगनी बाकी है। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी 1 जून से नई दिल्ली में चार दिनों तक बैठक करेंगे।

इस बैठक में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Pact) को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।

भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर खास बातचीत
भारत की तरफ से इस डील में नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करने वाले हैं।

भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक में कई अहम विषयों पर बातचीत होगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-
    बाजार पहुंच (Market Access)
    गैर-शुल्क बाधाएं (Non-Tariff Measures)
    सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा
    निवेश प्रोत्साहन
    आर्थिक सुरक्षा सहयोग
    सप्लाई चेन से जुड़ी रणनीतिक साझेदारी

दोनों देश पहले चरण के अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के साथ-साथ दीर्घकालिक व्यापक व्यापार समझौते के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचे पर भी चर्चा करेंगे।

फरवरी में बनी थी ट्रेड डील की रूपरेखा
भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तय की थी। इसके तहत दोनों देशों ने चरणबद्ध तरीके से व्यापारिक बाधाएं कम करने और टैरिफ में राहत देने पर सहमति जताई थी।

समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए शुल्कों में कटौती करने का आश्वासन दिया था। अमेरिका ने पहले भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% तक शुल्क लगाया था, जिसे घटाकर 18% करने की बात कही गई थी।

इसके अलावा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क को भी हटाने और शेष शुल्क को 18% तक सीमित करने का प्रस्ताव था।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला समीकरण
अमेरिका की घरेलू राजनीति और टैरिफ नीति में बदलाव के कारण वार्ताओं की दिशा प्रभावित हुई। 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को चुनौती देने वाले मामले में फैसला सुनाया।

इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10% समान शुल्क लागू करने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद फरवरी में प्रस्तावित भारत-अमेरिका वार्ता टल गई थी।

ट्रेड डील पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अप्रैल 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वॉशिंगटन की यात्रा की और बात को आगे बढ़ाया।

भारत की ओर से बड़े प्रस्ताव
भारत ने व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं पर शुल्क घटाने या समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।
    डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (DDGs)
    रेड सोरघम (पशु आहार)
    ट्री नट्स
    ताजे और प्रोसेस्ड फल
    सोयाबीन तेल
    वाइन और स्पिरिट्स

इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने की इच्छा जताई है।
    ऊर्जा उत्पाद
    विमान और विमान कलपुर्जे
    बहुमूल्य धातुएं
    प्रौद्योगिकी उत्पाद
    कोकिंग कोल

विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार का मौजूदा परिदृश्य
अमेरिका वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर सामने आया। भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़कर 87.3 अरब डॉलर पहुंच गया।

अमेरिका से आयात 15.95% बढ़कर 52.9 अरब डॉलर रहा। भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 40.89 अरब डॉलर था।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सभी देशों पर समान 10% शुल्क लागू किए जाने के बाद वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा का नया माहौल बन गया है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों अपने-अपने हितों के हिसाब से समझौते की शर्तों में बदलाव कर सकते हैं।

 

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