लखनऊ में अमेरिकी नागरिकों से अरबों की ठगी करने वाला साइबर गिरोह पकड़ा गया

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लखनऊ
 लखनऊ पुलिस ने शुक्रवार को एक ऐसे साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया, जो अमेरिकी नागरिकों को "नागरिकता रद्द होने की धमकी देकर डिजिटल अरेस्ट करता था और लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठता था। गिरोह के ज्यादातर सदस्य सातवीं-दसवीं फेल निकले, जो सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में शहीदपथ किनारे स्थित ओमेक्स आर-टू रेजिडेंशियल अपार्टमेंट से फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। पिछले छह महीनों में यह गिरोह दो अरब रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है और रोजाना 10-12 अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाता था। कैसे दी जाती थी नागरिकता रद्द होने की धमकी

कैसे दी जाती थी नागरिकता रद्द होने की धमकी
पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव के मुताबिक गिरोह पहले अमेरिका में बैठे अपने एजेंटों की मदद से वहां के नागरिकों के मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी जुटाता था। इसके बाद उनकी ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर पर टोलफ्री नंबर के साथ पॉप-अप मैसेज भेजा जाता था, जिसमें सिस्टम हैक होने, वायरस अटैक होने और *नागरिकता रद्द होने* जैसी गंभीर धमकियां दी जाती थीं। डर के मारे जब पीड़ित अमेरिकी नागरिक दिए गए नंबर पर फोन करते, तो कॉल सेंटर का कर्मचारी खुद को अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताकर उन्हें "जांच के दायरे में होने" का झांसा देता था। इसके बाद धमकाकर और बरगलाकर मामला निपटाने के नाम पर गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए ठगी की रकम मंगाई जाती थी। पुलिस को मिले एक लैपटॉप के साक्ष्य के मुताबिक एक ही अमेरिकी नागरिक से गिरोह ने 70 हजार डॉलर (करीब 70 लाख रुपये) तक की ठगी की थी।

हिंदी में लिखी जाती थी अंग्रेजी स्क्रिप्ट, रटवाकर कराई जाती थी याद
पूछताछ में यह भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गिरोह के कर्मचारियों को धमकी देने और बात करने के लिए अंग्रेजी की पूरी स्क्रिप्ट हिंदी में लिखकर दी जाती थी, जिसे रटवाकर याद कराया जाता था। यही वजह है कि सातवीं-आठवीं पास तक के जालसाज भी फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर खुद को अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी बताने में सफल हो जाते थे। यह कॉल सेंटर अमेरिकी दफ्तरों के समयानुसार ही संचालित होता था, ताकि पीड़ितों को असली सरकारी कॉल जैसा भरोसा दिलाया जा सके।

छापेमारी में सात गिरफ्तार, भारी बरामदगी
तड़के क्राइम ब्रांच, साइबर क्राइम सेल और स्थानीय थाने की संयुक्त टीम ने अपार्टमेंट की नौवीं मंजिल पर छापेमारी कर अहमदाबाद निवासी सरगना पुनीत कुमार वर्मा समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया। इनके पास से आठ लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, चार वाई-फाई/इंटरनेट राउटर, नौ हेडफोन, पांच लैपटॉप चार्जर, एक बेल आउट डिवाइस और दो कंप्यूटर माउस बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपियों में दीपेन चंद्रकांत पटेल, मो. सोहेल, मो. शाहनवाज आलम, मो. इमरान, मो. रियाज और सज्जाद हुसैन उर्फ सरफराज शामिल हैं, जो सभी गुजरात और पश्चिम बंगाल के निवासी हैं।

फर्जी दस्तावेजों पर करा रखा था वेरिफिकेशन
साइबर क्राइम सेल प्रभारी इंस्पेक्टर अमर सिंह के मुताबिक प्राथमिक जांच में सामने आया कि सरगना पुनीत ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पुलिस सत्यापन और रेंट एग्रीमेंट करा रखा था — उसके अलग-अलग दस्तावेजों में अहमदाबाद के दो अलग-अलग पते दर्ज मिले हैं, जिनकी अब तफ्तीश की जा रही है।

मास्टरमाइंड अभी भी फरार, अमेरिका में फैले नेटवर्क की जांच जारी
अपर पुलिस उपायुक्त किरन यादव के मुताबिक गिरोह के मास्टरमाइंड पुनीत कुमार वर्मा का बड़ा भाई यशचंद्र प्रकाश वर्मा अहमदाबाद से पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था और उसने अमेरिका में भी अपने एजेंट तैयार कर रखे थे। पुलिस टीम अब मास्टरमाइंड और गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है। साथ ही हाल में समिट बिल्डिंग से पकड़े गए 119 जालसाजों से इस गिरोह के संभावित कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।

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