सीताफल उत्पादन एवं प्रसंस्करण से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति में सुधार

Editor
4 Min Read
सीताफल उत्पादन एवं प्रसंस्करण से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति में सुधार
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

सफलता की कहानी

सीताफल उत्पादन एवं प्रसंस्करण से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति में सुधार

सिवनी जिला आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरा

भोपाल 

वर्तमान में मांगलिक आयोजनों, विशेषकर विवाह समारोहों में सीताफल से निर्मित व्यंजनों, जैसे सीताफल रबड़ी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। इस बढ़ती मांग की पूर्ति के लिये ऑफ-सीज़न में भी सीताफल पल्प का प्रसंस्करण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के सिवनी जिला में उत्पादित सीताफल ने स्थानीय स्तर पर महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन का प्रभावी माध्यम स्थापित किया है। पूर्व में आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में जीवन यापन कर रहीं महिलाओं की आय एवं जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है।

आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में पहल

सिवनी जिले के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले सीताफल के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन का कार्य वर्तमान में स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित किया जा रहा है। छपारा विकासखंड के अंतर्गत खेरमटाकोल (भूतबंधानी) स्थित महादेव ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती अभिलाषा ने बताया कि समूह से जुड़ने के पश्चात महिलाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध हुआ है। वे सीताफल की पैकिंग एवं विपणन के माध्यम से वार्षिक रूप से उल्लेखनीय आय अर्जित कर रही हैं। उत्पादों का विपणन स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राज्य के प्रमुख शहरों एवं छत्तीसगढ़ तक किया जा रहा है। सिवनी जिले में उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता एवं स्वाद के कारण इसकी मांग राष्ट्रीय स्तर, विशेषकर महानगरों में भी बढ़ रही है। वन क्षेत्रों में सीताफल पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव का कार्य भी महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है।

आय के स्थायी स्रोत का सृजन

बरोड़ा सिवनी विकासखंड के मां दुर्गा महिला आजीविका ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती रामप्यारी ने बताया कि सीताफल आधारित गतिविधियों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है तथा वे प्रतिवर्ष एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।

रोजगार सृजन एवं कौशल विकास

आजीविका मिशन के अंतर्गत छपारा विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रारंभिक चरण में 200 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। समूहों को विपणन, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग के माध्यम से उत्पादों को अन्य राज्यों तक सफलतापूर्वक भेजा जा रहा है। जिला परियोजना प्रबंधक श्री संजय रस्तोगी ने बताया कि सिवनी का सीताफल प्राकृतिक रूप से अत्यंत स्वादिष्ट एवं मीठा होता है। इस उत्पाद को “एक जिला एक उत्पाद” योजना में भी शामिल किया गया है, जिससे इसकी ब्रांड पहचान सुदृढ़ हुई है।

सीताफल पल्प प्रसंस्करण की व्यवस्था

बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सीताफल के गूदे (पल्प) का प्रसंस्करण एवं संरक्षण किया जा रहा है। जिले में स्थापित दो प्रसंस्करण इकाइयों में पल्प को निम्न तापमान पर संरक्षित कर वर्षभर उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इससे बड़े आयोजनों एवं बाजार की मांग के अनुरूप निरंतर आपूर्ति संभव हो पाती है।

आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर सिवनी

एसआरएलएम भोपाल के राज्य परियोजना प्रबंधक (कृषि) श्री मनीष पंवार ने बताया कि सिवनी जिले की महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही हैं। अनुकूल जलवायु के कारण यहां उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता उत्कृष्ट है, जिससे इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। सिवनी जिला वर्तमान में आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।

 

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *