देश में पहली बार पशुओं के लिए ब्लड बैंक की सुविधा, हिसार से शुरू हुआ ‘जीव संजीवनी’ महाअभियान

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देश में पहली बार पशुओं के लिए ब्लड बैंक की सुविधा, हिसार से शुरू हुआ ‘जीव संजीवनी’ महाअभियान
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हिसार.

सामाजिक सरोकारों को जनभागीदारी से जोड़ने की अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दैनिक जागरण ने मंगलवार को पशु कल्याण के क्षेत्र में देश की पहली अनूठी पहल का सूत्रपात किया।

लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के सहयोग से ‘जीव संजीवनी’ महाअभियान शुरू किया गया, जिसके तहत हिसार में देश का पहला संगठित पशु रक्तदान शिविर लगा। इसका उद्देश्य भविष्य में पशुओं का स्वैच्छिक रक्तदाता नेटवर्क विकसित करना है। शिविर के पहले दिन चार श्वानों और एक भैंस ने रक्तदान कर इस नई पहल का हिस्सा बनने का संदेश दिया।

उपचार के समय रक्तदाता की तलाश होती है बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं, बड़े ऑपरेशनों, प्रसव संबंधी जटिलताओं, एनीमिया, चीचड़ जनित रोगों और अत्यधिक रक्तस्राव की स्थितियों में पशुओं को तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन देश में अब तक पशुओं के लिए संगठित रक्तदाता व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी थी। ऐसे में कई बार उपचार के दौरान उपयुक्त रक्तदाता की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। महाअभियान के शुभारंभ अवसर पर लुवास के कुलपति प्रो. डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि पशुओं के लिए रक्तदाता का उपलब्ध न होना काफी समय से बड़ी चुनौती रहा है।

लुवास में सुरक्षित रखा जाएगा रक्त
एकत्रित रक्त को लुवास में सुरक्षित रूप से किया जाएगा संरक्षित लुवास में उपलब्ध ब्लड बैंक सुविधा के माध्यम से एकत्रित रक्त को सुरक्षित रूप से संरक्षित किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर गंभीर रूप से बीमार पशुओं के उपचार में उसका उपयोग किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया गया तो भविष्य में देशभर में पशु रक्तदान की संगठित व्यवस्था विकसित हो सकती है।

लुवास में पहले से उपलब्ध है पशु ब्लड बैंक
लुवास में पशुओं के लिए ब्लड बैंक की सुविधा संचालित है, जहां सुरक्षित परिस्थितियों में रक्त को लगभग 40 दिन तक संरक्षित रखा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर यह रक्त दुर्घटना, सर्जरी, प्रसव जटिलताओं और बीमारियों से जूझ रहे पशुओं के उपचार में उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार संगठित रक्तदाता नेटवर्क विकसित होने से हजारों पशुओं को समय पर उपचार मिल सकेगा।

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