संविदा कर्मियों के तबादले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, याचिका खारिज

Editor
3 Min Read
संविदा कर्मियों के तबादले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, याचिका खारिज
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

बिलासपुर.

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संविदा आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के स्थानांतरण (तबादले) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट की एकल पीठ ने साफ किया है कि शासकीय सेवाओं में ट्रांसफर और पोस्टिंग नौकरी का एक अनिवार्य व स्वाभाविक हिस्सा है।

किसी भी संविदा कर्मचारी का तबादला किस स्थान पर किया जाना चाहिए, यह तय करना पूरी तरह से संबंधित सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) का विशेषाधिकार है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के एक संविदा कर्मी की याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार के निर्णय में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से साफ इंकार कर दिया है।

इस प्रकार से समक्षें क्या है पूरा मामला
प्रशासनिक विशेषाधिकार बहाल: हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण पूरी तरह से कार्यपालिका (Executive) का काम है, जिसमें न्यायपालिका सामान्यतः हस्तक्षेप नहीं करेगी। दुर्भावना सिद्ध करना अनिवार्य: अदालत के रुख से साफ है कि ट्रांसफर रुकवाने के लिए केवल संविदा होने का तर्क काफी नहीं है, बल्कि आदेश के पीछे किसी दुर्भावना या नियम के उल्लंघन को साबित करना होगा।

अनुच्छेद 226 का हवाला: चीफ जस्टिस की मंशा के अनुरूप कोर्ट ने रिट क्षेत्राधिकार के सीमित उपयोग पर जोर दिया, खासकर तब जब निर्णय किसी विशेषज्ञ वैधानिक संस्था द्वारा लिया गया हो। मुंगेली के संविदा कर्मी को झटका: स्वास्थ्य विभाग द्वारा 6 मई 2026 को किए गए इस अंतर-जिला ट्रांसफर के बाद अब याचिकाकर्ता को नए जिले में ज्वाइनिंग देनी ही होगी।

हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका और ये कहा
याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा है, शासकीय सेवाओं में ट्रांसफर और पोस्टिंग नौकरी का एक स्वाभाविक हिस्सा है। कोर्ट ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट को स्थानांतरण के मामलों में हस्तक्षेप करने का बहुत ही सीमित अधिकार है, खासकर तब जब निर्णय किसी विशेषज्ञ वैधानिक संस्था द्वारा लिया गया हो। कोर्ट ने राज्य शासन के स्थानांतरण आदेश में किसी प्रकार की अवैधता या विधिक त्रुटि ना होने की बात कहते हुए रिट याचिका को खारिज कर दिया है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *