चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर की विदेश में फिर नीलामी, नीदरलैंड में 10 अक्टूबर को बिकेंगी 2 कुर्सियां

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 चंडीगढ़
 चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर की विदेशों में नीलामी का मामला फिर गरमा गया है। शहर की प्रशासनिक इमारतों में इस्तेमाल किए गए और प्रसिद्ध वास्तुकार पियरे जेनरे द्वारा डिजाइन किए गए फर्नीचर की विदेशों में नीलामी को लेकर एडवोकेट अजय जग्गा ने यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि पेरिस में प्रस्तावित नीलामी में संबंधित फर्नीचर बिक नहीं पाया, लेकिन अब 10 अक्टूबर को नीदरलैंड में पियरे जेनरे की डिजाइन की दो कुर्सियों की नीलामी प्रस्तावित है।

जग्गा ने सात अक्टूबर को प्रशासक को भेजे पत्र में मांग की है कि यदि अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है तो तत्काल दर्ज की जाए, ताकि विदेश मंत्रालय के माध्यम से संबंधित देश के अधिकारियों और नीलामी घर को नीलामी रोकने के लिए कहा जा सके। उनका तर्क है कि बिना एफआईआर के राजनयिक स्तर पर कार्रवाई करने में दिक्कत आती है।

नीलामी कैटलॉग में चंडीगढ़ का स्पष्ट उल्लेख नीदरलैंड के हेसिन्क फाइन आर्ट ऑक्शनरिस की नीलामी में लॉट नंबर 28 में पियरे जेनरे की दो एक्स-लेग आर्मचेयर शामिल हैं। इनकी अनुमानित कीमत 5,000 से 7,000 यूरो और शुरुआती बोली 3,000 यूरो बताई गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैटलॉग में इनकी प्रोवेनेंस स्पष्ट रूप से फ्रॉम द एडमिनिस्ट्रैटिव बिल्डिंग्स, चंडीगढ़, इंडिया लिखी गई है।

इसी तरह पेरिस के Artcurial की नीलामी में लॉट नंबर 73 में पियरे जेनरे की ‘चेयर वी टाइप केन सीट, केन बैक’ शामिल थी। इसकी अनुमानित कीमत 4,000 से 6,000 यूरो थी और कैटलॉग में प्रोवेनेंस एडमिनिस्ट्रैटिव बिल्डिंग्स, चंडीगढ़ दर्ज था। जग्गा के अनुसार पेरिस की नीलामी में यह वस्तु न तो बिकी और न ही नीलाम हो पाई।

जांच हो कि फर्नीचर चंडीगढ़ से विदेश कैसे पहुंचा
जग्गा ने प्रशासन से मांग की है कि नीलामी घरों से इन वस्तुओं की पूरी प्रोवेनेंस हिस्ट्री, खरीद-बिक्री के दस्तावेज, निर्यात-आयात और कस्टम दस्तावेज तथा स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड मांगे जाएं। साथ ही यह भी जांच हो कि ये वस्तुएं चंडीगढ़ की प्रशासनिक इमारतों से कब, किसकी अनुमति से और किस माध्यम से बाहर गईं।

उन्होंने कहा कि मामला केवल फर्नीचर की खरीद-बिक्री का नहीं है। पियरे जेनरे का फर्नीचर चंडीगढ़ के निर्माण और इसकी आधुनिक वास्तुकला की विरासत से सीधे जुड़ा है। ऐसे में प्रशासनिक भवन में इस्तेमाल हुआ कोई फर्नीचर सामान्य व्यावसायिक वस्तु नहीं माना जा सकता।

विरासत फर्नीचर का डेटाबेस बनाने की मांग
जग्गा ने चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर के संरक्षण के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की भी मांग की है। इसमें प्रशासनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध फर्नीचर की सूची तैयार करने, विदेशों में पहुंच चुके या गायब विरासत सामान का केंद्रीय डेटाबेस बनाने तथा जरूरत पड़ने पर इंटरपोल, कस्टम विभाग, संग्रहालयों और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ समन्वय करने का सुझाव दिया है।

उन्होंने प्रशासक से मांग की है कि हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल (HIPC) को प्रभावी रूप से सक्रिय किया जाए और जिन वस्तुओं पर चंडीगढ़ का वैध स्वामित्व साबित हो, उनकी वापसी और पुनर्स्थापना (रिपैट्रिएशन) के लिए कानूनी और राजनयिक कार्रवाई की जाए।

जग्गा ने संविधान के अनुच्छेद 49 का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय महत्व की कला और ऐतिहासिक वस्तुओं की सुरक्षा राज्य का दायित्व है। इसलिए नीदरलैंड की नीलामी से पहले कार्रवाई करना जरूरी है।

 

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