चंडीगढ़.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संबंधित भ्रामक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार हैदराबाद निवासी 44 वर्षीय हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी की जमानत याचिका जिला अदालत ने दूसरी बार खारिज कर दी है।
अदालत ने कहा कि चालान का पेश होना जमानत का आधार नहीं हो सकता, विशेषकर जब आरोपित के खिलाफ गंभीर आरोप हों। यह मामला 19 अप्रैल को सेक्टर-26 थाना में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। पुलिस ने सिद्दीकी को विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री मोदी से संबंधित फर्जी वीडियो प्रसारित किया। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि सिद्दीकी को झूठा फंसाया गया है और वह ढाई महीने से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले में दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य हैं, जिससे जांच को प्रभावित करने की संभावना नहीं है।
वहीं, सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी बाकी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। बता दें कि इस मामले में लेखिका मधु किश्वर पर भी गंभीर आरोप हैं।
