दिल्ली में BRICS सुरक्षा शिखर बैठक आज से, आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर होगी बड़ी चर्चा

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नई दिल्ली
भारत की अध्यक्षता में सोमवार से देश की राजधानी नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSAs) और सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों की एक बेहद महत्वपूर्ण दो दिवसीय बैठक शुरू होने जा रही है। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। बैठक में सीमा पार आतंकवाद, पश्चिम एशिया के बदलते सुरक्षा हालात और रूस-यूक्रेन युद्ध सहित कई वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।

यह बैठक इस साल सितंबर में भारत में ही आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। भारत इस समय ब्रिक्स समूह का मौजूदा अध्यक्ष है।

चीनी विदेश मंत्री से भी होगी बात
इस सुरक्षा सम्मेलन में सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व रक्षा मंत्री सेर्गेई शोइगु और ईरानी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव नेजामीपुर शामिल हैं। चीनी विदेश मंत्री वांग यी की इस यात्रा के दौरान जीत डोभाल के साथ एक अलग द्विपक्षीय बैठक होने की भी संभावना है, जिस पर विश्लेषकों की पैनी नजर रहेगी। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा है कि चीन वैश्विक सुरक्षा स्थिति और पारंपरिक-गैर-पारंपरिक चुनौतियों पर ब्रिक्स सदस्यों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करने और सितंबर शिखर सम्मेलन के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने को उत्सुक है।

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार इस बैठक का मुख्य विषय ‘विश्व के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां’ रखा गया है। इस दौरान तेजी से बदलते राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों का स्वरूप, नई और उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका और उनसे पैदा होने वाले खतरे के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्यबल और सूचना व संचार प्रौद्योगिकियों (ICT) के सुरक्षित उपयोग की समीक्षा की जाएगी।

भारत उठाएगा सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत इस मंच पर आतंकवाद, विशेष रूप से पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूहों द्वारा जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाकर की जाने वाली सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों का मुद्दा मजबूती से उठाएगा। इसके अलावा, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी मौजूदा तनाव और टकराव पर भी बैठक में बात हो सकती है।

सहमति बनाने की चुनौती
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर ब्रिक्स गुट के भीतर ही अलग-अलग रुख और भू-राजनीतिक तनाव देखने को मिल रहे हैं। इससे पहले मई में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच गहरे मतभेदों के कारण कोई साझा बयानृ जारी नहीं हो सका था, जिसके बाद भारत को चेयरमैन स्टेटमेंट जारी करना पड़ा था। चूंकि ब्रिक्स में सभी फैसले आम सहमति (से होते हैं, इसलिए भारत के सामने सभी देशों को एक मंच पर लाने की बड़ी कूटनीतिक जिम्मेदारी होगी।

अब इस समूह में 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र (Egypt), इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश हैं। यह संगठन अब वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर विचार-विमर्श का एक बेहद शक्तिशाली और बड़ा मंच बन चुका है।

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