झारखंड में ब्लड डोनेशन कमेटी गठित, हर जिले में होगी निगरानी

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रांची
 राज्य सरकार ने प्रदेश में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने और रक्तदान सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने सभी जिलों में ब्लड डोनेशन एंड मानीटरिंग कमेटी के गठन का आदेश जारी किया है।

यह कदम झारखंड उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में उठाया गया है। मुख्य सचिव ने 7 जुलाई, 2026 को सभी वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र जारी कर यह निर्देश दिया। यह आदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा जनहित याचिकाओं में पारित आदेशों के आलोक में दिया गया है।

न्यायालय ने स्वास्थ्य विभाग और राज्य रक्त संक्रमण परिषद को निर्देश दिया था कि स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों के माध्यम से शत-प्रतिशत रक्त संग्रह सुनिश्चित किया जाए। इस समिति की हर महीने बैठक सुनिश्चित करने को कहा गया है।

जिला-स्तरीय समिति की संरचना और जिम्मेदारियां
जिलों में होने वाली इस समिति की अध्यक्षता उपायुक्त करेंगे, जबकि उप-विकास आयुक्त उपाध्यक्ष होंगे। समिति में वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, सिविल सर्जन, वन अधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, आईएमए के प्रतिनिधि और सरकारी व निजी रक्त केंद्रों के चिकित्सा पदाधिकारी जैसे अन्य संबंधित अधिकारी एवं हितधारक शामिल होंगे।

समिति के प्रमुख कार्यों में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और अन्य रक्तदान-निर्भर रोगियों के लिए निर्बाध रक्त उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।

साथ ही, रक्त के माध्यम से फैलने वाले संक्रमणों की अनिवार्य जांच, जिले की वार्षिक रक्त आवश्यकता का आकलन, स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का कैलेंडर तैयार करना और ई-रक्तकोष पोर्टल पर आंकड़ों का नियमित अद्यतन सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्य सचिव के पत्र में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में कुल 3,68,345 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया है, जिसमें से 3,798 शिविरों के माध्यम से 1,27,035 यूनिट रक्त स्वैच्छिक दान से मिला।

गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार किसी जिले की वार्षिक रक्त आवश्यकता उसकी कुल आबादी का लगभग एक प्रतिशत होती है।

 

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