बिहार पंचायत चुनाव पर संकट, समय पर नहीं होंगे चुनाव? हाईकोर्ट में 26 नवंबर को अगली सुनवाई

Editor
4 Min Read

पटना
 सरकार ने निर्धारित समय पर पंचायत चुनाव कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके पीछे तर्क चुनाव से पहले परिसीमन, आरक्षण की जटिल प्रक्रिया एवं ट्रिपल टेस्ट के उपरांत आरक्षण का निर्धारण है।

पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर दायर याचिका पर पांच अक्टूबर को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई व सरकार की ओर से दिए गए उत्तर में यह जानकारी सामने आई है। हाई कोर्ट में अब अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी। ऐसे में स्पष्ट है कि अब राज्य निर्वाचन आयोग निर्धारित समय पर चुनाव नहीं करा पाएगा।

विदित हो कि दिसंबर-2026 के मध्य से लेकर जनवरी-2027 के प्रथम सप्ताह में पंचायतों एवं ग्राम कचहरियों का वर्तमान कार्यकाल पूर्ण हो रहा है।

हालांकि आगामी पंचायत चुनाव में अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया एक कदम आगे बढ़ी है। सरकार ने इसके लिए एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान को दायित्व देने का निर्णय लिया है।

संस्थान के शोधार्थी विशेषज्ञों के नेतृत्व में पंचायतों में जाकर अति पिछड़े वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इसके आधार पर पंचायत चुनाव में आरक्षण की सीमा और वर्गवार प्रतिनिधित्व को लेकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

उधर, अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने भी जिलेवार दौरा कर पंचायतों में विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है।

विशेषज्ञाें के अनुसार, त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल पूर्ण होने पहले संविधान के अनुच्छेद 243-ई के अनुसार कार्यकाल पूर्ण होने से पहले राज्य निर्वाचन आयोग का दायित्व है कि वह चुनाव संपन्न कराएगा। लेकिन वर्तमान तैयारियों को देखते हुए ऐसा संभव नहीं दिख रहा है।

ट्रिपल टेस्ट की जटिल है प्रक्रिया
सरकार की ओर से त्रिस्तरीय पंचायतों एवं ग्राम कचहरियों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान है जिसमें अति पिछड़ों को 20 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जाना है।

इसके लिए जरूरी ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करने का काम अति पिछड़ा वर्ग आयोग को दिया गया है। आयोग राजनीतिक पिछड़ेपन का अध्ययन कर आरक्षण के लिए सरकार को अपनी अनुशंसा देगा। आरक्षण देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार तीन स्तर पर प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

इसमें पिछड़ेपन की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक समर्पित आयोग का गठन, प्रत्येक स्थानीय निकाय में आरक्षण के अनुपात का निर्धारण और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की कुल सीमा निर्धारित सीमा से अधिक न हो।

इसी प्रक्रिया को ट्रिपल टेस्ट कहा जाता है। राज्य सरकार द्वारा कराए गए जातिगत सर्वे में अति पिछड़ी जातियों की कुल संख्या 112 है।

प्रतिनिधित्व पर एक नजर
    मुखिया की संख्या : 8053
    सरपंच की संख्या : 8053
    वार्ड सदस्य की संख्या : 109635
    वार्ड पंच की संख्या : 109635
    पंचायत समिति सदस्य : 11085
    जिला परिषद सदस्य : 1160

 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live