AJL प्लॉट केस में भूपेंद्र हुड्डा की बढ़ीं मुश्किलें, ED की याचिका पर हाई कोर्ट सख्त

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चंडीगढ़.

हरियाणा के बहुचर्चित एजेएल (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) प्लाट आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपितों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा मनी लान्ड्रिंग मामले की कार्यवाही बंद करने के आदेश को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

ईडी की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में न केवल निचली अदालत के 3 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, बल्कि उस पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने की भी अपील की गई है। पूरा मामला पंचकूला सेक्टर-6 स्थित प्लाट नंबर सी-17 से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2005 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान एजेएल को दोबारा आवंटित किया गया था। आरोप है कि यह बहुमूल्य भूखंड वर्ष 1982 की पुरानी दरों करीब 91 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर दिया गया, जबकि उस समय बाजार मूल्य कहीं अधिक था। जांच एजेंसियों के अनुसार इस निर्णय से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर ईडी ने वर्ष 2016 में धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया और वर्ष 2018 में लगभग 64 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को कुर्क कर लिया था।

मामले में महत्वपूर्ण मोड़ 25 फरवरी 2026 को आया, जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मूल आपराधिक मामले में आरोपितों को राहत प्रदान की। इसके बाद पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत ने यह कहते हुए ईडी की कार्यवाही समाप्त कर दी कि जब मूल अपराध ही समाप्त हो गया तो मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही स्वत टिक नहीं सकती। हालांकि अदालत ने यह छूट दी थी कि यदि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट मूल मामले को बहाल करता है तो ईडी पुन कार्रवाई शुरू कर सकती है। अब ईडी ने हाई कोर्ट में दलील दी है कि पीएमएलए अदालत ने कानून की गलत व्याख्या की। एजेंसी के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है और ‘विजय मदनलाल चौधरी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि अपराध से अर्जित संपत्ति की जांच केवल मूल एफआईआर पर निर्भर नहीं रहती।

ईडी ने यह भी बताया कि सीबीआई पहले ही हाई कोर्ट के फरवरी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुकी है, जहां नोटिस जारी हो चुका है। ऐसे में कार्यवाही बंद रहने से कुर्क संपत्ति मुक्त कराने की कोशिशें जांच को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती हैं। सोमवार को हाई कोर्ट के जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने याचिका पर सुनवाई करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपितों को आठ जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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