अशोक खेमका केस: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र के आदेश रद्द

Editor
4 Min Read
अशोक खेमका केस: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र के आदेश रद्द
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

चंडीगढ़

 हरियाणा कैडर के चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके जरिये खेमका को भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल किए जाने का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था।

अदालत ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने समान परिस्थितियों वाले कई अन्य आईएएस अधिकारियों को नियमों में छूट देकर यह लाभ दिया है तो अशोक खेमका को इससे वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने 29 मई 2026 को यह फैसला सुनाया। अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस अधिकारी थे। वर्ष 2010 में उन्हें भारत सरकार में संयुक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के कई अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल कर दिया गया, लेकिन खेमका को यह लाभ नहीं मिला।

केंद्र सरकार ने कहा था कि उन्होंने भारत सरकार में उप सचिव या उससे ऊपर के पद पर कम से कम तीन वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी नहीं की है, इसलिए वे पात्र नहीं हैं। खेमका ने इस निर्णय को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी। उनका तर्क था कि केंद्र सरकार ने पहले भी कई आईएएस अधिकारियों को इस शर्त में छूट देकर अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एंपैनल किया है, जबकि उनके पास भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का आवश्यक अनुभव नहीं था।

उन्होंने 20 ऐसे अधिकारियों की सूची पेश की, जिनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान और अन्य राज्यों के आईएएस अधिकारी शामिल थे। इनमें से कई अधिकारियों को शून्य केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनुभव के बावजूद अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था।

हाई कोर्ट ने पाया कि केंद्र सरकार ने याचिका में उठाए गए इन तथ्यों का कोई प्रभावी खंडन नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि नियमों में छूट देने की शक्ति मौजूद है और उसका उपयोग अन्य समान अधिकारियों के पक्ष में किया गया है, तो अशोक खेमका को वही लाभ नहीं देना स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि खेमका का दावा खारिज होने के बाद भी तमिलनाडु कैडर के 1992 बैच के आईएएस अधिकारी जे राधाकृष्णन को इसी प्रकार की छूट देकर अतिरिक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था।

हालांकि, अदालत ने माना कि खेमका अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति का वास्तविक लाभ नहीं दिया जा सकता। फिर भी हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में जिन आयोगों, प्राधिकरणों, ट्रिब्यूनलों या अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल होना वांछनीय या प्राथमिक योग्यता माना जाता है, वहां अशोक खेमका को भी उसी स्तर का अधिकारी माना जाएगा और उन्हें एंपैनल अतिरिक्त सचिव/सचिव के समान दर्जा दिया जाएगा। इस प्रकार अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें भविष्य की नियुक्तियों और अवसरों के लिए समान अधिकार प्रदान कर दिए।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *