Retirement Day Arrest: रिटायरमेंट के दिन IAS प्रदीप कुमार गिरफ्तार, 169 करोड़ के घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन

Editor
5 Min Read
Retirement Day Arrest: रिटायरमेंट के दिन IAS प्रदीप कुमार गिरफ्तार, 169 करोड़ के घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

चंडीगढ़
सरकारी नौकरी में रिटायरमेंट का दिन आमतौर पर विदाई, सम्मान और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. लेकिन हरियाणा के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के लिए यही दिन कानूनी कार्रवाई का दिन बन गया. हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के तत्कालीन सदस्य सचिव और आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उनके अंतिम कार्य दिवस पर गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान सरकारी धन के 169 करोड़ रुपये के कथित गबन और फर्जी निवेश से जुड़े मामले में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

यह गिरफ्तारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह उस बहुचर्चित बैंकिंग घोटाले की कड़ी है, जिसमें हरियाणा सरकार के कई विभागों के करोड़ों रुपये कथित तौर पर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और संदिग्ध बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किए गए. सीबीआई का दावा है कि अकेले HSPCB को 169 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसे एजेंसी हरियाणा सरकार के किसी विभाग को हुआ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान बता रही है। 

जानिए, क्या है पूरा मामला

सीबीआई के अनुसार, प्रदीप कुमार मूल रूप से 2011 बैच के हरियाणा सिविल सेवा (HCS) अधिकारी थे, जिन्हें बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत किया गया. सदस्य सचिव के तौर पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने बोर्ड की निवेश संबंधी प्रक्रिया में सीधे तौर पर भूमिका निभाई. जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने निर्धारित वित्तीय सीमा से कहीं अधिक राशि को चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित IDFC First Bank शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) बनाने के नाम पर ट्रांसफर करने की मंजूरी दी. यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ लिया। 

फिक्स्ड डिपॉजिट कभी बना ही नहीं
सीबीआई की जांच में सामने आया कि जिस रकम को एफडी के लिए भेजा गया था, वह पहले HSPCB के नाम से कथित तौर पर खोले गए एक बैंक खाते में ट्रांसफर की गई. जांच एजेंसी का कहना है कि इस खाते को खोलने के लिए न तो विभागीय स्वीकृति ली गई थी और न ही इसका कोई अधिकृत रिकॉर्ड मौजूद था. सबसे गंभीर आरोप यह है कि उस खाते में कभी कोई फिक्स्ड डिपॉजिट बनाया ही नहीं गया. इसके बजाय खाते से कथित तौर पर फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन किए गए और 169 करोड़ रुपये की रकम निकाल ली गई. सीबीआई का कहना है कि यह पूरा लेनदेन सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसकी जांच अभी जारी है। 

नोटिस के बाद भी नहीं हुए पेश
जांच एजेंसी के मुताबिक, प्रदीप कुमार को कई बार जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजे गए थे, लेकिन वह पूछताछ से बचते रहे. इसी बीच उन्होंने पंचकूला की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका भी दायर कर दी थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित थी. सीबीआई ने बताया कि उनकी लोकेशन ट्रेस करने के बाद मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. संयोग यह रहा कि उसी दिन उनका सरकारी सेवा का अंतिम कार्य दिवस भी था। 

504 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा है मामला
HSPCB का यह मामला अकेला नहीं है. जांच एजेंसी के अनुसार, यह 504 करोड़ रुपये के उस बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों के सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग की जांच चल रही है. सीबीआई का आरोप है कि सरकारी रकम को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर बैंक खातों में भेजा गया. बाद में कथित तौर पर फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए रकम निकालकर विभिन्न शेल कंपनियों तक पहुंचाई गई. इसी नेटवर्क की पूरी वित्तीय श्रृंखला की जांच अब सीबीआई कर रही है। 

राज्य सरकार के अनुरोध पर CBI ने संभाली जांच
शुरुआत में इस पूरे मामले की जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कर रहा था. बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की. सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, विभागीय फाइलों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच शुरू की. बताया जा रहा  है कि सीबीआई के अनुसार, अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है. इनमें IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के छह अधिकारी,  हरियाणा सरकार के तीन अधिकारी, दो प्राइवेट कंपनियां और उसमें काम करने वाल छह कर्मचारी शामिल हैं.  प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी से पहले भी दो सीनियर सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *