23,000 करोड़ की मेगा डील से मजबूत होगी थल सेना, चीन-पाक सीमा पर बढ़ेगी भारत की मारक क्षमता

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नई दिल्ली

भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. हाल ही में भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की बड़ी डील को मंजूरी मिलने के बाद अब थल सेना के लिए भी खजाना खुलता दिख रहा है. सेना 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी स्वचालित तोपें खरीदने की तैयारी में है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। 

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से आधुनिक बनाया है. वायुसेना को पहले 36 राफेल लड़ाकू विमान मिले. इसके बाद भारतीय नौसेना के लिए भी राफेल मरीन विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई. अब एयरफोर्स के लिए और 114 राफेल खरीदे जा रहे हैं. अब सरकार का फोकस थल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने पर है. इसी रणनीति के तहत K9 वज्र तोपों की बड़ी खरीद की तैयारी चल रही है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की टू-फ्रंट वार यानी चीन और पाकिस्तान दोनों से एक साथ निपटने की रणनीति का हिस्सा है। 

रक्षा सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी हॉवित्जर खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. प्रस्ताव जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के सामने रखा जा सकता है. मंजूरी मिलने पर यह भारतीय सेना के इतिहास की सबसे बड़ी तोपखाना खरीद परियोजनाओं में शामिल होगी। 

K9 वज्र ने पिछले कुछ वर्षों में सेना का भरोसा जीता है. मूल रूप से इसे रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में युद्ध के लिए विकसित किया गया था. लेकिन पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तैनात किया गया.कठिन मौसम और पहाड़ी इलाकों में भी इसके प्रदर्शन ने सेना को प्रभावित किया. यही कारण है कि सेना अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ाना चाहती है। 

K9 वज्र-टी एक 155 मिमी और 52 कैलिबर की आधुनिक स्वचालित तोप है. यह ट्रैक वाले प्लेटफॉर्म पर चलती है. इसलिए टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के साथ तेजी से आगे बढ़ सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है शूट एंड स्कूट क्षमता. यानी दुश्मन पर गोले बरसाने के तुरंत बाद यह अपनी जगह बदल सकती है. इससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है. आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बेहद अहम मानी जाती है। 

भारतीय सेना के पास फिलहाल 100 K9 वज्र तोपें हैं. इसके अलावा 2024 में 100 और तोपों की खरीद को मंजूरी दी गई थी. इस सौदे की कीमत 7,629 करोड़ रुपये थी. अगर नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो सेना के पास K9 वज्र का विशाल बेड़ा तैयार हो जाएगा. इससे भारतीय तोपखाने की ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। 

K9 वज्र का निर्माण भारत में किया जाता है. इसे लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की हनव्हा एयरोस्पेस की साझेदारी में तैयार किया जाता है. इसमें स्वदेशी सामग्री का हिस्सा लगातार बढ़ाया गया है. इसलिए यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

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