राजस्थान में बिजली संकट से बचने के लिए 16.62 रुपये प्रति यूनिट तक महंगी बिजली खरीदने की मंजूरी

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जयपुर
राजस्थान में आगामी रबी सीजन और कड़ाके की सर्दी के दौरान बिजली संकट व बड़े स्तर पर अघोषित कटौती से बचने के लिए राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने डिस्कॉम्स को 10 से 16.62 रुपए प्रति यूनिट की दर से महंगी शॉर्ट-टर्म बिजली खरीदने की मंजूरी दे दी है, जबकि आयोग ने 4.59 रुपए प्रति यूनिट की अधिकतम दर स्वीकृति कर रखी है। राजस्थान ऊर्जा विकास एंड आईटी सर्विसेज लिमिटेड की ओर से डीईईपी पोर्टल पर निकाली निविदा में एक ही कंपनी एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड के आगे आने के बावजूद नियमों में छूट देते हुए 40 से 45 मेगावाट बिजली खरीद की यह विशेष अनुमति जारी की गई है। यह बिजली मध्य भारत पावर कॉरपोरेशन से एनवीवीएन के माध्यम से ली जाएगी। एक और आदेश में हिमाचल प्रदेश सरकार से 16.62 रुपए प्रति यूनिट से 1300 मेगावाट पनबिजली खरीद की भी स्वीकृति दी गई है

किस दर और समय पर होगी खरीद

नवंबर में (सुबह 5.30 से 9.30 बजे): 45 मेगावाट आपूर्ति, दर 9.49 रु/यूनिट

नवंबर (शाम 4.30 से 9.30 बजे): 40 मेगावाट आपूर्ति, दर 9.99 रुपए/यूनिट

दिसंबर (शाम 4 से 9 बजे): 30 मेगावाट आपूर्ति, दर 9.99 रुपए/यूनिट

बिजली संकट के पीछे के मुख्य कारण
1. उत्पादन में भारी गिरावट: सितंबर में आरवीयूएनएल के प्लांट्स से 5800 मेगावाट के मुकाबले महज 4795 मेगावाट बिजली मिली।

2. यूनिट्स में खराबी: कालीसिंध की यूनिट-1 (600 मेगावाट) और कोटा की यूनिट-6 (195 मेगावाट) में तकनीकी खराबी के चलते उत्पादन ठप रहा।

3. कोयले की कमी: राष्ट्रीय स्तर पर कोयला आपूर्ति पर दबाव और कम बारिश के चलते हाइड्रो पावर में 12 प्रतिशत की गिरावट आई।

हालांकि, खरीद लागत की अंतिम समीक्षा वास्तविक वित्तीय मिलान एवं अंतिम समायोजन प्रक्रिया के दौरान की जाएगी। आयोग के चेयरमैन डॉ. राजेश शर्मा और सदस्य हेमंत कुमार जैन व विजय पाल सिंह की पीठ ने आदेश में स्पष्ट किया कि यह अनुमति ग्रिड अनुशासन बनाए रखने और किसानों को रबी फसल की सिंचाई के दौरान बिजली संकट से बचाने के लिए दी जा रही है।

गौरतलब है कि ग्रिड से लगातार तय सीमा से अधिक बिजली लेने पर नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर ने राजस्थान को 'अलर्ट', 'इमरजेंसी' और 'एक्सट्रीम इमरजेंसी' तक के उल्लंघन मैसेज जारी किए थे।

पीक ऑवर्स में3255 मेगावाट तक का अंतर
आयोग के समक्ष पेश आंकड़ों के मुताबिक, आगामी महीनों में सुबह और शाम के पीक समय में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर रहेगा। नवंबर में सुबह के समय 1821 मेगावाट और शाम को 960 मेगावाट का घाटा अनुमानित है। वहीं, दिसंबर में यह कमी सुबह 3255 मेगावाट और शाम को 1650 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। जनवरी 2027 में भी सुबह 3032 मेगावाट की कमी रहने का अनुमान है।

सिंगल बिडर को क्यों चुनना पड़ा?
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी खरीद में कम से कम दो बिडर्स होने चाहिए, लेकिन 2 और 8 अक्टूबर को पावर एक्सचेंज पर बिड लगाने के बाद भी कोई आगे नहीं आया। इसके बाद 12 अक्टूबर की रिवर्स नीलामी में सिर्फ एनवीवीएन ने ही बोली लगाई। चूंकि बाजार में पीक ऑवर्स के लिए 20 रुपए प्रति यूनिट तक की बोलियां आ रही थीं। ऐसे में आयोग ने 9.99 रुपए तक की बोली को तकनीकी रूप से व्यावहारिक मानते हुए सिंगल बिडर क्लॉज 7.1 के तहत मंजूरी दी।

कुप्रबंधन की कीमत चुका रहे उपभोक्ता
बिजली कुप्रबंधन का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। मांग के अनुरूप बिजली उपलब्ध नहीं होने पर डिस्कॉम को महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। इसका सीधा आर्थिक बोझ उपभोक्ताओं के बिजली बिलों पर पड़ता रहा है। विदेश से महंगा कोयला खरीदने के मामले में भी उपभोक्ताओं से पांच पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से अतिरिक्त राशि वसूली गई थी। यह वसूली कई महीनों तक बिजली बिलों के माध्यम से की गई।

सोलर ऊर्जा को प्रमोट करे सरकार
राजस्थान में दिन में सौर ऊर्जा की बहुत अच्छी उपलब्धि होते हुए भी पूरी उपयोग नहीं कर पाने से 2000 मेगावाट से अधिक कटौती कराना व दूसरे स्रोतों से इतनी महंगी बिजली खरीद कर डिस्कॉम्स व जनता पर भारी बोझ डालना अदूरदर्शिता है। सौर ऊर्जा को औद्योगिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर राज्य इस भारी अतिरिक्त बोझ से बच सकता है।- येवन्ती कुमार बोलिया, रिटायर्ड एसई व ऊर्जा सलाहकार

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