राखीगढ़ी में 6 मीटर नीचे प्राचीन जलधारा का खुलासा, हड़प्पा काल के वॉटर सिस्टम से उठेगा पर्दा

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नारनौंद/चंडीगढ़.

राखीगढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता की संरचना को समझने के लिए चल रही उत्खनन प्रक्रिया में अब नई परतें सामने आने लगी हैं। टीलों के किनारों पर की जा रही खोदाई में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं।

टीलों के बीच जलधारा होने के प्रमाण टीले एक पर करीब छह मीटर की गहराई तक खोदाई के दौरान मिले हैं, जहां नीचे रेतीली मिट्टी पाई गई है। इससे संकेत मिल रहा है कि यहां कभी नदी या बड़ा जल स्रोत रहा होगा। राखीगढ़ी को हड़प्पा कालीन सभ्यता का एक बड़ा मेगा सिटी माना जाता है, जो दृष्टवती नदी के किनारे बसा हुआ था। टीले एक और तीन के बीच जलधारा बहने के संकेत लगातार मिल रहे हैं। खोदाई में पानी के बहाव के साथ मृदभांड के टुकड़े भी प्राप्त हुए हैं, जिससे शोधकर्ताओं को इस क्षेत्र की प्राचीन संरचना को समझने में मदद मिल रही है। अब टीम और अधिक गहराई तक खुदाई का रोडमैप तैयार कर रही है, ताकि इन संकेतों को ठोस प्रमाण में बदला जा सके।

सामने आई अहम खोज
खोदाई के दौरान एक और अहम खोज सामने आई है। टीले एक पर एक बड़े आकार का मिट्टी का स्टोरेज जार मिला है, जिसका मुंह एक छोटे मिट्टी के बर्तन से बंद किया गया है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इसमें कोई कीमती वस्तु या अनाज हो सकता है। इस जार में करीब डेढ़ सौ किलो तक अनाज संग्रहित किया जा सकता है। अब तक की खोदाई में इतना बड़ा स्टोरेज जार नहीं मिला था, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है। इसके अलावा उत्खनन में अन्य मिट्टी के बर्तन, हड्डियों के टुकड़े और कच्ची ईंटों की दीवारें भी मिली हैं। इन सभी नमूनों की टीएल डेटिंग के लिए दिल्ली भेजा जाएगा, जिससे इनके कालखंड का सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा।

जल स्रोत के संकेत बड़ी उपलब्धि, जार खोलने पर होगा खुलासा
अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज सक्सेना ने बताया कि खोदाई में जल स्रोत के प्रमाण मिलना बड़ी उपलब्धि है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यहां कभी नदी बहती थी या बड़ा तालाब मौजूद था, जिसका उपयोग उस समय के लोग करते थे। अभी छह मीटर तक खोदाई की गई है और तीन-चार मीटर और गहराई तक जाने की योजना है। उन्होंने बताया कि मिला बड़ा स्टोरेज जार पूरी तरह बंद है और इसे सावधानी से खोलने की तैयारी की जा रही है। जार खुलने के बाद ही अंदर रखी वस्तु का वास्तविक पता चल सकेगा, जिससे सभ्यता के जीवनशैली के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।

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