इंस्टाग्राम पर स्टूडेंट प्रोटेस्ट कंटेंट शैडो-बैन का आरोप, मेटा से जवाब मांग

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नई दिल्ली
 सोशल मीडिया यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स ने बुधवार को शिकायत की कि दिल्ली में चल रहे स्टूडेंट प्रोटेस्ट की फोटोज और वीडियोज को मेटा की तरफ से बिना किसी एक्सप्लेनेशन या अलर्ट के इंस्टाग्राम पर शैडो-बैन किया जा रहा है। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) के फाउंडर और वकील अपार गुप्ता ने ET को बताया कि कुछ स्टोरीज को अब रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया है और उन पर 'sensitive content' का मैसेज दिख रहा है, जबकि उनमें ऐसा कुछ भी सेंसिटिव नहीं है। इनमें टेलीविजन ब्रॉडकास्ट के क्लिप्स और इसी तरह का कंटेंट शामिल है।

कई यूजर्स ने नोट किया कि मेटा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और पॉलिटिशियन अनीश गवान्डे की पोस्ट्स को 'sensitive content' के तौर पर मार्क किया था। IFF फाउंडर अपार गुप्ता ने कहा कि हालांकि ये ट्रांसपेरेंसी का एक लिमिटेड फॉर्म है, लेकिन सच ये है कि रिस्ट्रिक्शन तो लगाया जा रहा है, पर कंटेंट स्टैंडर्ड खुद डिस्क्लोज नहीं किया जा रहा है। वे मेटा से ये डिस्क्लोज करने की मांग कर रहे हैं कि ऐसा क्यों किया जा रहा है।

पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर प्रोटेस्ट साइट पर हुई झड़पों के वीडियोज और फोटोज भरे पड़े हैं, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। कई यूजर्स ने कहा कि उनका इंस्टाग्राम फीड प्रोटेस्ट से जुड़ी पोस्ट्स को प्रायोरिटी नहीं दे रहा है। ET की रिपोर्ट के मुताबिक, नाम न छापने की शर्त पर एक यूजर ने बताया कि उनका इंस्टाग्राम डिस्कवरी पेज प्रोटेस्ट की इमेजेस और वीडियोज नहीं दिखा रहा है, जबकि वे पिछले कुछ हफ्तों से ऐसा कंटेंट एक्टिवली देख रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि कुछ पोस्ट्स को 'sensitive content' के तौर पर फ्लैग किया गया है, लेकिन 'know more' पर क्लिक करने के बाद भी वे उसे देख नहीं पा रहे हैं।

IFF ने मेटा से पूछा है कि क्या रिपोर्ट की गई कोई भी कार्रवाई सरकारी अथॉरिटीज की लीगल डिमांड्स से जुड़ी है। एल्गोरिदम पर इंस्टाग्राम के ब्लॉग के मुताबिक, प्लेटफॉर्म के पास ऐसा कोई सिंगल एल्गोरिदम नहीं है जो ये तय करे कि लोग एप पर क्या देखते हैं। ब्लॉग में कहा गया है कि वे कई तरह के एल्गोरिदम, क्लासिफायर्स और प्रोसेस का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें से हर एक का अपना पर्पज होता है।

इस बीच, सेंसिटिव कंटेंट पर मेटा का कम्युनिटी स्टैंडर्ड कहता है कि वे समझते हैं कि ग्राफिक और वॉयलेंट इमेजरी को लेकर लोगों की सेंसिटिविटी अलग-अलग होती है। यूजर्स को ऐसे कंटेंट से बचाने के लिए, वे सबसे ज्यादा ग्राफिक कंटेंट को हटा देते हैं और दूसरे टाइप के कंटेंट पर वार्निंग लेबल जोड़ देते हैं ताकि लोगों को क्लिक करने से पहले पता चल सके कि ये सेंसिटिव हो सकता है।

अकाउंट ब्लॉकिंग
बुधवार शाम को 25 मिलियन फॉलोअर्स वाले CJP के ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट को टेम्परेरी तौर पर ब्लॉक कर दिया गया था। मेटा ने हैंडल पर एक मैसेज इश्यू किया कि ये अकाउंट इंडिया में अवेलेबल नहीं है, क्योंकि उन्होंने इस कंटेंट को रिस्ट्रिक्ट करने की लीगल रिक्वेस्ट का पालन किया है। इससे पहले उसी दिन, रिपोर्ट्स आईं थी कि मेटा ने CJP के स्पोक्सपर्सन सौरव दास के अकाउंट को सिस्टम द्वारा गलती से सस्पेंड करने के बाद अनब्लॉक कर दिया था। मेटा के ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम ने इस अकाउंट को गलती से फ्लैग कर दिया था, जिसे गलती सामने आने के बाद रिस्टोर कर दिया गया।

लीगल राइट्स
हालांकि ये प्रोटेस्ट फिजिकली नई दिल्ली में हुआ, लेकिन देशभर के नागरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट्स और स्टोरीज के जरिए ऑनलाइन उनसे जुड़े। लीगल और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक दंगों या प्रोटेस्ट के दौरान प्लेटफॉर्म्स के पास कुछ सेंसरशिप पावर्स होती हैं। हालांकि, बिना किसी एक्सप्लेनेशन या रीजनिंग के, ऐसी कार्रवाइयां संविधान के आर्टिकल 19 (1) (a) का उल्लंघन कर सकती हैं, जो फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन की गारंटी देता है।

एक इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने कहा कि इस बात के डॉक्यूमेंटेड सबूत मौजूद हैं कि अट्रॉसिटीज और ह्यूमन राइट्स एब्यूज से जुड़े कंटेंट को, जिन्हें UN जैसी ह्यूमन राइट्स बॉडीज और ऑर्गनाइजेशन्स रिकॉग्नाइज करती हैं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा रिस्ट्रिक्ट किया गया है।

सोमवार को CJP ने NEET-UG एग्जाम में हुई गड़बड़ियों को लेकर जंतर-मंतर से दिल्ली स्थित संसद तक 'चलो संसद' मार्च का कॉल दिया था, जिसमें प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

 

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