वायुसेना की ताकत बढ़ी, तेजस विमानों का बेड़ा पूरा; स्वदेशी जेट से बढ़ेगी क्षमता

Editor
3 Min Read

नई दिल्ली

हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने शुक्रवार को भारतीय वायुसेना को पूरी तरह स्वदेशी 20 तेजस विमानों की डिलीवरी का अनुबंध पूरा कर लिया। अंतिम खेप में दो सीट वाले दो तेजस प्रशिक्षण विमान वायुसेना को सौंपे गए। इसके साथ ही एचएएल ने वायुसेना के लिए 70 एचटीटी-40 बेसिक प्रशिक्षण विमानों की डिलीवरी के अनुबंध की भी शुरुआत की। निजी विमानन कंपनी पवनहंस को चार ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर भी सौंपे गए।

बेंगलुरु में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू की मौजूदगी में विमानों और हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी की गई। अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2010 में रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच हुए एफओसी अनुबंध के तहत 20 तेजस विमानों की आपूर्ति होनी थी। इनमें 16 एक सीट वाले लड़ाकू विमान और चार दो सीट वाले प्रशिक्षण विमान शामिल थे।

पहले ही दिए जा चुके हैं 16 लड़ाकू विमान
सभी 16 लड़ाकू विमानों और दो प्रशिक्षण विमानों की आपूर्ति पहले ही की जा चुकी थी। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए स्वदेश में विकसित प्रौद्योगिकियां समय की मांग हैं। अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया।

क्या है इन विमानों की खासियत
एचटीटी-40 (हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40) स्वदेश में डिजाइन और विकसित किया गया प्रशिक्षक विमान है, जिसे भारतीय रक्षा सेवाओं की शुरुआती प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। एचएएल के एक बयान के अनुसार, एलसीए एफओसी प्रिशक्षु विमान एक हल्का, हर मौसम में काम करने वाला और कई तरह की भूमिकाएं निभाने वाला 4.5-जेनरेशन का विमान है, जिसे मुख्य रूप से वायुसेना की प्रशिक्षण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

बयान के अनुसार, '' इन तकनीकों ने भारत को एक उन्नत दो-सीट वाला लड़ाकू विमान क्षमता विकसित करने और उसे संचालित करने में सक्षम बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में ऐसा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जो असैन्य और सैन्य विमानन दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा कर सके। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक संगठनों के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं देखना चाहिए।' अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए सिंह ने वैज्ञानिकों और अभियंताओं से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live