हरभजन पर भड़के AAP कार्यकर्ता, जालंधर में घर पर लिखा ‘गद्दार’, मित्तल भी निशाने पर

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हरभजन पर भड़के AAP कार्यकर्ता, जालंधर में घर पर लिखा ‘गद्दार’, मित्तल भी निशाने पर
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जालंधर

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह के पार्टी छोड़ने पर गुस्सा थम नहीं रहा। शनिवार को पंजाब में पार्टी कार्यकर्ता भड़के हुए नजर आए। नाराज कार्यकर्ताओं ने हरभजन के जालंधर स्थित आवास पर गद्दार लिख दिया। गौरतलब है कि पंजाब से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह शुक्रवार को राघव चड्ढा के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हो गए। आम आदमी पार्टी के कुल सात सांसदों ने भाजपा का दामन थामा है। वहीं, एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें अशोक मित्तल की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के गेट पर आप कार्यकर्ता गद्दार लिख रहे हैं।

वीडियो में क्या आया नजर
इसका वीडियो भी वायरल हुआ है। वीडियो में नजर आ रहा है कि आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता हरभजन सिंह के आवास पर पहुंचे हैं। यह लोग उनके घर की दीवार पर स्प्रे पेंट से गद्दार लिख रहे हैं। इस दौरान वहां सुरक्षा में तैनात पुलिस के जवान उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं। हालांकि पुलिस के रोकने के बावजूद यह लोग अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं। ब्लैक स्प्रे पेंट से अंग्रेजी और पंजाबी में दीवार पर गद्दार लिखा नजर आ रहा है।

मित्तल काे भी नहीं छोड़ा
कुछ ऐसा ही हाल अशोक मित्तल का भी हुआ है। अशोक मित्तल की लवली प्रोफेशन यूनिवर्सिटी के गेट के बाहर बड़ी संख्या में आप कार्यकर्ता पहुंचे। इन लोगों ने गेट पर ब्लैक स्प्रे पेंट से लिखा है, ‘पंजाब का गद्दार’। बताया जाता है कि इन राज्यसभा सांसदों के आप छोड़ने के बाद से पार्टी कार्यकर्ता काफी ज्यादा नाराज हैं। गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहाकि इन लोगों ने पंजाब की पीठ में छुरा घोंपा है और गद्दारी की है।

‘आप’ का क्या कहना है
आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह ने शनिवार को कहा कि पार्टी राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर उन सात सांसदों को सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग करेगी, जिन्होंने एक दिन पहले पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था। संजय सिंह ने कहाकि दल-बदल विरोधी कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्यसभा और लोकसभा में किसी भी प्रकार का विभाजन या गुटबंदी नहीं हो सकती। इसे कोई कानूनी मान्यता नहीं मिलती, भले ही दो-तिहाई बहुमत हो। उन्होंने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची और दल-बदल विरोधी कानून दोनों ही राज्यसभा या लोकसभा में किसी भी प्रकार के विभाजन, अलग गुट या धड़े को मान्यता नहीं देते, चाहे दो-तिहाई बहुमत ही क्यों न हो।

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