होर्मुज पर ईरान में टकराव, IRGC और पेजेशकियान सरकार आमने-सामने

Editor
3 Min Read
होर्मुज पर ईरान में टकराव, IRGC और पेजेशकियान सरकार आमने-सामने
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब ईरान के भीतर भी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं. एक ओर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कट्टरपंथी कमांडर किसी भी कीमत पर होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखने और अमेरिका के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के पक्ष में हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान की निर्वाचित मसूद पेजेशकियान सरकार बातचीत के जरिए संकट का समाधान चाहती है.

सौफान सेंटर के वरिष्ठ विश्लेषक केनेथ कैट्ज़मैन के अनुसार, ईरान के भीतर इस समय दो अलग-अलग सोच काम कर रही हैं. उनका कहना है कि IRGC के शीर्ष कमांडर और कट्टरपंथी नेता मानते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखना ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है.

IRGC का मकसद सिर्फ समुद्री मार्ग पर पकड़ बनाए रखना ही नहीं, बल्कि मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेना भी है. उनका मानना है कि अमेरिका को ऐसा जवाब दिया जाए कि वह भविष्य में कभी ईरान पर हमला करने की हिम्मत न करे.

ईरान में IRGC बनाम पेजेशकियान सरकार
दूसरी तरफ राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ जैसे नागरिक नेता युद्ध को आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में हैं. विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की निर्वाचित सरकार चाहती है कि ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से वार्ता शुरू हो और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कोई सहमति बनाई जाए.

उधर अमेरिका ने भी साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना उसकी राष्ट्रीय और रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है. वॉशिंगटन का कहना है कि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है और इसे बंद करने की किसी भी कोशिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान के कट्टरपंथी गुट अपने रुख पर अड़े रहते हैं और होर्मुज स्ट्रेट को बंद रखने की नीति जारी रहती है, तो अमेरिका की ओर से और बड़े सैन्य हमले हो सकते हैं. वहीं अगर पेजेशकियान सरकार IRGC पर दबाव बनाकर उसे पीछे हटने के लिए तैयार कर लेता है, तो ओमान की मध्यस्थता में एक नया समझौता संभव हो सकता है.

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *