MP की मंत्री प्रतिमा बागरी पर बढ़ा सियासी संकट, विधायकी और मंत्री पद पर लटकी तलवार

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भोपाल 

मध्यप्रदेश की एक महिला मंत्री की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हाईकोर्ट के एक आदेश के कारण वे बुरी तरह घिर गई हैं। यहां तक कि मंत्रिमंडल से बाहर होने का खतरा भी मंडराने लगा है। प्रदेश की नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी फर्जी जाति प्रमाण पत्र में घिरीं हैं। उन्हें राज्यस्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने तलब किया है। प्रतिमा बागरी को उन दस्तावेजों को लेकर आना होगा, जिसमें उनकी अनुसूचित जाति प्रमाणित हो सके। ऐसा नहीं करने पर उनका मंत्रीपद भी जा सकता है। पद पर खतरा मंडराने के बीच मंत्री प्रतिमा बागरी भोपाल में एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने नदी बचाने का संदेश दिया।

एससी कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार की हाईकोर्ट में दायर याचिका पर निर्देश के बाद यह आदेश जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने छानबीन समिति को संबंधित पक्षों को बुलाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच करने के आदेश दिए थे। समिति को यह तय करने को कहा गया है कि मंत्री प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति (एससी) का प्रमाण-पत्र वैध है या नहीं।

हाईकोर्ट ने समिति द्वारा जांच पूरी करने और इसके बाद उचित आदेश पारित करने के लिए समय सीमा भी तय की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि 30 जून 2026 तक समिति द्वारा निर्णय नहीं लेने पर याचिका को पुनर्जीवित (रिवाइव) किया जा सकेगा।

गलत तरीके से अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण-पत्र बनवाने का आरोप
कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने याचिका में प्रतिमा बागरी पर गलत तरीके से अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण-पत्र बनवाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बागरी ने अनुचित तरीके से आरक्षण का लाभ लेकर रैगांव सीट से चुनाव लडा।

याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार का दावा है कि संबंधित इलाके में बागरी जाति, अनुसूचित जाति यानि एससी की सूची में शामिल नहीं है। उनका यह भी कहना है कि प्रतिमा बागरी राजपूत जाति से संबंधित हैं।

उन दस्तावेजों को लेकर आना होगा, जिसमें अनुसूचित जाति प्रमाणित हो
अनूसचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र के आरोपों से घिरीं नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी की मुश्किलें मंगलवार को उस समय बढ़ गई जब उन्हें राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने 6 जुलाई को तलब किया। उन्हें उन दस्तावेजों को लेकर आना होगा, जिसमें अनुसूचित जाति प्रमाणित हो। दस्तावेज न देने पर मंत्रीमंडल से उनकी छुट्टी हो सकती है। प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त कार्यालय ने इस संबंध में नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी होते ही मंत्री प्रतिमा बागरी एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।

जाति प्रमाणपत्र पर घिरीं मंत्री प्रतिमा बागरी ने नदी बचाने का संदेश दिया है। मंगलवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जल है तो कल है। मंत्री प्रतिमा बागरी ने एक्स हेंडल पर लिखा—

भोपाल स्थित होटल मैरियट में आयोजित नमामि गंगे मिशन अंतर्गत “डीपीआर तैयार करने एवं बेतवा नदी पुनर्जीवन विषयक क्षमता संवर्धन कार्यशाला” को संबोधित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यशाला में बेतवा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन, वैज्ञानिक प्रबंधन एवं दीर्घकालिक जल संवर्धन की दिशा में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। हमारी नदियाँ केवल जलधारा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला हैं।

सामूहिक प्रयास, जनभागीदारी एवं प्रभावी योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाने का हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

जल है तो कल है — नदी बचेगी, तभी प्रकृति और भविष्य सुरक्षित रहेगा।

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