देश के जलाशयों में तेजी से घटा पानी, 22 दिनों में 12% स्टॉक कम होने से संकट गहराया

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 नई दिल्ली

 भीषण गर्मी और सूखे की बढ़ती आशंकाओं के बीच देश के सामने एक नई और गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, मई महीने की शुरुआत से लेकर अंत तक देश के मुख्य जलाशयों में पानी का स्तर बेहद तेजी से नीचे आया है।

महज 22 दिनों के भीतर इनमें पानी का स्टॉक 12% तक कम हो गया है, जिसके बाद अब कुल क्षमता का केवल 25% पानी ही शेष बचा है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में मई के आखिरी हफ्ते तक कुल लाइव भंडारण घटकर 45.419 बिलियन क्यूबिक मीटर पर सिमट गया है।

मई महीने में आई भारी गिरावट
मई के शुरुआती सप्ताह में इन जलाशयों में 66.830 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद था, जो इनकी कुल क्षमता का 36.41% था। इसका सीधा अर्थ यह है कि कड़कती धूप और पानी की भारी मांग के कारण एक महीने के भीतर ही मुख्य जल स्रोतों से लगभग 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हो गया है।

मौसम विभाग ने पहले ही अल नीनो के प्रभाव के कारण सूखे की आशंका जताई है, जिसने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि वर्तमान स्टॉक पिछले साल की इसी अवधि और पिछले दस वर्षों के औसत से थोड़ा बेहतर है, लेकिन जिस रफ्तार से बांध खाली हो रहे हैं, वे आने वाले हफ्तों के लिए बड़ी चुनौती हैं।

संकटग्रस्त बांधों की बढ़ती संख्या
मई की शुरुआत में जब गर्मी का असर कम था, तब देश के 112 बांधों में पानी का स्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में था। लेकिन जैसे-जैसे पारा चढ़ा, स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई। अत्यधिक गर्मी के कारण महीने के अंत तक कई जलाशय खाली हो चुके हैं, जिससे गंभीर संकट का सामना कर रहे बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 तक पहुंच गई है। सतारा का कोयना बांध भी इस समय गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है।

पानी की किल्लत की सबसे भयावह और डरावनी तस्वीर दक्षिण भारतीय राज्यों में देखने को मिल रही है, जहां जल स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया है। मई की शुरुआत में यहां के जलाशयों में कुल क्षमता का 26.83% पानी बचा था, जो मई के अंतिम सप्ताह की रिपोर्ट में गिरकर मात्र 17.55% रह गया है।

इसके कारण कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पानी की किल्लत काफी बढ़ गई है। देश के कुछ हिस्सों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी बांध और बिहार का चंदन बांध जैसे बड़े जलाशय मई की शुरुआत से लेकर अंत तक पूरी तरह सूखे रहे और वहां पानी का स्तर शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया।

बिजली उत्पादन पर संकट
पानी की इस भारी कमी का सीधा असर देश के हाइड्रोपावर सेक्टर पर पड़ने की आशंका है। देश की 20 प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से 8 में मई की शुरुआत में ही पानी का स्टॉक सामान्य से नीचे चला गया था, और अब 6 बड़े जलाशयों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

भौगोलिक दृष्टि से देखें तो मध्य भारत में जल भंडारण 41.57% से घटकर 26.60% और पश्चिमी भारत में 42.36% से कम होकर 28.53% पर आ गया है, जबकि साबरमती जैसी छोटी नदी घाटियों में पानी का भारी अकाल साफ देखा जा सकता है। इस भीषण संकट के बीच अब सभी की निगाहें केवल आने वाले मानसून पर टिकी हैं।

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